Celebrating Great Writing

Category: waseem barelvi

चांद का ख्वाब उजालों की नज़र लगता हैतू जिधर हो के गुज़र जाए खबर लगता है। उस की यादों ने उगा रखे हैं सूरज इतनेशाम का वक्त भी आए तो सहर लगता है एक मंज़र पे ठहरने नहीं देती फ़ितरतउम्र…

लहू न हो तो क़लम तरजुमाँ नहीं होताहमारे दौर में आँसू ज़ुबाँ नहीं होता जहाँ रहेगा वहीं रौशनी लुटायेगाकिसी चराग़ का अपना मकाँ नहीं होता ये किस मक़ाम पे लाई है मेरी तनहाईके मुझ से आज कोई बदगुमाँ नहीं होता…

निगाहों के तक़ाज़े चैन से मरने नहीं देते यहाँ मंज़र ही ऐसे हैं कि दिल भरने नहीं देते ये लोग औरों के दुख जीने निकल आए हैं सड़कों पर अगर अपना ही ग़म होता तो यूँ धरने नहीं देते यही…

कही-सुनी पे बहुत एतबार करने लगेमेरे ही लोग मुझे संगसार करने लगे पुराने लोगों के दिल भी हैं ख़ुशबुओं की तरहज़रा किसी से मिले, एतबार करने लगे नए ज़माने से आंखें नहीं मिला पायेतो लोग गुज़रे ज़माने से प्यार करने…

मैं चाहता भी यही था वो बेवफ़ा निकलेउसे समझने का कोई तो सिलसिला निकले किताब-ए-माज़ी के पन्ने उलट के देख ज़रान जाने कौन-सा पन्ना मुड़ा हुआ निकले जो देखने में बहुत ही क़रीब लगता हैउसी के बारे में सोचो तो फ़ासला  निकले…

तहरीर से वरना मिरी क्या हो नहीं सकताइक तू है जो लफ़्ज़ों में अदा हो नहीं सकता आँखों में ख़यालों में जो सांसों में बसा हैचाहे भी तो मुझसे वह जुदा हो नहीं सकता जीना है तो ये जब्र भी…

मैं अपने ख्व़ाब से बिछडा नज़र नहीं आतातो इस सदी में अकेला नज़र नहीं आता अजब दबाव है इन बाहरी हवाओं काघरों का बोझ भी उठता नज़र नहीं आता मैं तेरी राह से हटने को हट गया लेकिनमुझे तो कोई…

उदास एक मुझी को तो कर नही जातावह मुझसे रुठ के अपने भी घर नही जाता वह दिन गये कि मुहबबत थी जान की बाज़ीकिसी से अब कोई बिछडे तो मर नही जाता तुमहारा प्यार तो सांसों मे सांस लेता…

आँखों आँखों रहे और कोई घर न होख्व़ाब जैसा किसी का मुकद्दर न हो क्या तमन्ना है रौशन तो सब हो मगरकोई मेरे चराग़ों से बढ कर न हो रौशनी है तो किस काम की रौशनीआँख के पास जब कोई…

हवेलियों में मिरी तर्बियत नहीं होती तो आज सर पे टपकने को छत नहीं होती हमारे घर का पता पूछने से क्या हासिल उदासियों की कोई शहरियत नहीं होती चराग़ घर का हो महफ़िल का हो कि मंदिर का हवा…

Back to top