Celebrating Great Writing

Category: Sahir Ludhanvi

ये दुनिया दो-रंगी है एक तरफ़ से रेशम ओढ़े एक तरफ़ से नंगी है एक तरफ़ अंधी दौलत की पागल ऐश-परस्ती एक तरफ़ जिस्मों की क़ीमत रोटी से भी सस्ती एक तरफ़ है सोनागाची एक तरफ़ चौरंगी है ये दुनिया…

मेरी अदबी और ज़ाती जिंदगी दोनों ही सर गर्म थीं। अमृता से मुलाकातों का सिलसिला जारी था। हम जब भी करीब होते, मैंने यह बहुत बार महसूस किया कि अमृता बहुत शिद्दत से मेरे चेहरे, हाथ और उंगलियों पर गौर…

शायद यह भी एक वजह थी इन्होंने इतनी शादियां कीं लेकिन फिर भी लड़के से मरहूम रहे। उन्होंने 11 वीं शादी मेरी अम्मी सरदारी बेगम से की जो कश्मीरी थी ।अम्मी के वालिद जनाब अब्दुल अजीज पेशे से ठेकेदार थे…

दूर रह कर न करो बात क़रीब आ जाओ याद रह जाएगी ये रात क़रीब आ जाओ एक मुद्दत से तमन्ना थी तुम्हें छूने की आज बस में नहीं जज़्बात क़रीब आ जाओ सर्द झोंकों से भड़कते हैं बदन में…

मेरी तक़दीर में जलना है तो जल जाऊँगा तेरा वा’दा तो नहीं हूँ जो बदल जाऊँगा सोज़ भर दो मिरे सपने में ग़म-ए-उल्फ़त का मैं कोई मोम नहीं हूँ जो पिघल जाऊँगा दर्द कहता है ये घबरा के शब-ए-फ़ुर्क़त में…

मैं तुझे फिर मिलूँगीकहाँ कैसे पता नहींशायद तेरे कल्पनाओंकी प्रेरणा बनतेरे केनवास पर उतरुँगीया तेरे केनवास परएक रहस्यमयी लकीर बनख़ामोश तुझे देखती रहूँगी मैं तुझे फिर मिलूँगीकहाँ कैसे पता नहीं या सूरज की लौ बन करतेरे रंगो में घुलती रहूँगीया…

तू किसी और के दामन की कली है लेकिन मेरी रातें तिरी ख़ुश्बू से बसी रहती हैं तू कहीं भी हो तिरे फूल से आरिज़ की क़सम तेरी पलकें मिरी आँखों पे झुकी रहती हैं तेरे हाथों की हरारत तिरे…

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