Celebrating Great Writing

Category: Kunwar Bechain

मौत तो आनी है तो फिर मौत का क्यूँ डर रखूँ ज़िंदगी आ तेरे क़दमों पर मैं अपना सर रखूँ जिस में माँ और बाप की सेवा का शुभ संकल्प हो चाहता हूँ मैं भी काँधे पर वही काँवर रखूँ…

नदी बोली समन्दर से, मैं तेरे पास आई हूँ।मुझे भी गा मेरे शायर, मैं तेरी ही-ही रुबाई हूँ॥ मुझे ऊँचाइयों का वह अकेलापन नहीं भाया;लहर होते हुये भी तो मेरा मन न लहराया;मुझे बाँधे रही ठंडे बरफ की रेशमी काया।बड़ी…

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