Celebrating Great Writing

Category: Dr. Rahat Indori

जो मेरा दोस्त भी है, मेरा हमनवा भी हैवो शख्स, सिर्फ भला ही नहीं, बुरा भी है मैं पूजता हूँ जिसे, उससे बेनियाज़ भी हूँमेरी नज़र में वो पत्थर भी है खुदा भी है सवाल नींद का होता तो कोई…

हवा खुद अब के हवा के खिलाफ है, जानीदिए जलाओ के मैदान साफ़ है, जानी हमे चमकती हुई सर्दियों का खौफ नहींहमारे पास पुराना लिहाफ है, जानी वफ़ा का नाम यहाँ हो चूका बहुत बदनाममैं बेवफा हूँ मुझे ऐतराफ है,…

सर पर बोझ अँधियारों का है मौला खैरऔर सफ़र कोहसारों का है मौला खैर दुशमन से तो टक्कर ली है सौ-सौ बारसामना अबके यारों का है मौला खैर इस दुनिया में तेरे बाद मेरे सर परसाया रिश्तेदारों का है मौला…

पेशानियों पे लिखे मुक़द्दर नहीं मिलेदस्तार कहाँ मिलेंगे जहाँ सर नहीं मिले आवारगी को डूबते सूरज से रब्त हैमग़्रिब के बाद हम भी तो घर पर नहीं मिले कल आईनों का जश्न हुआ था तमाम रातअन्धे तमाशबीनों को पत्थर नहीं…

समन्दरों में मुआफिक हवा चलाता हैजहाज़ खुद नहीं चलते खुदा चलाता है ये जा के मील के पत्थर पे कोई लिख आयेवो हम नहीं हैं, जिन्हें रास्ता चलाता है वो पाँच वक़्त नज़र आता है नमाजों मेंमगर सुना है कि…

तीरगी चांद के ज़ीने से सहर तक पहुँचीज़ुल्फ़ कन्धे से जो सरकी तो कमर तक पहुँची मैंने पूछा था कि ये हाथ में पत्थर क्यों हैबात जब आगे बढी़ तो मेरे सर तक पहुँची मैं तो सोया था मगर बारहा…

मैं लाख कह दूँ कि आकाश हूँ ज़मीं हूँ मैं मगर उसे तो ख़बर है कि कुछ नहीं हूँ मैं अजीब लोग हैं मेरी तलाश में मुझ को वहाँ पे ढूँड रहे हैं जहाँ नहीं हूँ मैं मैं आइनों से…

मोहब्बतों के सफ़र पर निकल के देखूँगा ये पुल-सिरात अगर है तो चल के देखूँगा सवाल ये है कि रफ़्तार किस की कितनी है मैं आफ़्ताब से आगे निकल के देखूँगा मज़ाक़ अच्छा रहेगा ये चाँद-तारों से मैं आज शाम…

हौसले ज़िंदगी के देखते हैं चलिए कुछ रोज़ जी के देखते हैं नींद पिछली सदी की ज़ख़्मी है ख़्वाब अगली सदी के देखते हैं रोज़ हम इक अँधेरी धुँद के पार क़ाफ़िले रौशनी के देखते हैं धूप इतनी कराहती क्यूँ…

अब अपनी रूह के छालों का कुछ हिसाब करूँ मैं चाहता था चराग़ों को आफ़्ताब करूँ मुझे बुतों से इजाज़त अगर कभी मिल जाए तो शहर-भर के ख़ुदाओं को बे-नक़ाब करूँ उस आदमी को बस इक धुन सवार रहती है…

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