Celebrating Great Writing

Category: Death Anniversary

कोई ये कैसे बता ये के वो तन्हा क्यों हैंवो जो अपना था वो ही और किसी का क्यों हैंयही दुनिया है तो फिर ऐसी ये दुनिया क्यों हैंयही होता हैं तो आखिर यही होता क्यों हैं एक ज़रा हाथ…

सरे राह…..कहीं कोई मिल जाये ….हमसफ़र पर तन्हा तन्हा चाँद रहा तन्हा तन्हा जीवन का आसमाँ ….लफ्ज़ों ने कहा…..चांद तन्हा है आसमाँ तन्हादिल मिला है कहाँ कहाँ तन्हा…..राह देखा करेगा सदियों तकछोड़ जायेंगे ये जहाँ तन्हा……इश्क ने मारा ऐसा मारा…

निदा फाजली उर्दू और हिंदी दुनिया के अजीम शायरों और गीतकारों में आज भी शुमार हैं. उनके गीत काफी सरल माने जाते हैं, जो हर एक की जुबान पर चढ़े रहते थे. ऐसी ही खासियत थी गज़ल गायक जगजीत साहब…

दुष्यंत कुमार ने अमिताभ को लिखे इस पत्र में कहा, ‘किसी फिल्म आर्टिस्ट को पहली बार खत लिख रहा हूं। वह भी ‘दीवार’ जैसी फिल्म देखकर, जो मानवीय करुणा और मनुष्य की सहज भावुकता का अंधाधुंध शोषण करती है।’ कवि…

मेरी तलब था एक शख़्स वो जो नहीं मिला तो फिर हाथ दुआ से यूँ गिरा भूल गया सवाल भी उस की सुख़न-तराज़ियाँ मेरे लिए भी ढाल थीं उस की हँसी में छुप गया अपने ग़मों का हाल भी गाह…

तुम्हारी फाइलों में गाँव का मौसम गुलाबी हैमगर ये आंकड़े झूठे हैं ये दावा किताबी है उधर जम्हूरियत का ढोल पीते जा रहे हैं वोइधर परदे के पीछे बर्बरीयत है ,नवाबी है लगी है होड़ – सी देखो अमीरी औ…

उस की हसरत है जिसे दिल से मिटा भी न सकूँ ढूँडने उस को चला हूँ जिसे पा भी न सकूँ डाल के ख़ाक मेरे ख़ून पे क़ातिल ने कहा कुछ ये मेहंदी नहीं मेरी कि छुपा भी न सकूँ…

घटता-बढ़ता रोज़, किसी दिन ऐसा भी करता हैनहीं किसी की भी आँखों को दिखलाई पड़ता हैअब तू ही ये बता, नाप तेरी किस रोज़ लिवाएँसी दे एक झिंगोला जो हर रोज़ बदन में आए ! (अब चान्द का जवाब सुनिए।) हंसकर…

पत्थर की मूरतों में समझा है तू ख़ुदा है ख़ाक-ए-वतन का मुझ को हर ज़र्रा देवता है आ ग़ैरियत के पर्दे इक बार फिर उठा दें बिछड़ों को फिर मिला दें नक़्श-ए-दुई मिटा दें सूनी पड़ी हुई है मुद्दत से…

फ़ाकिर का 73 साल की उम्र में जालंधर में 19 फरवरी 2008 को निधन हुआ। फ़ाकिर अपनी शायरी के लिए जीते थे और उन्हें बेहतर बनाने के लिए बहुत मेहनत करते थे। जब वे मशहूर हो गए तब उनकी लिखी…

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