Celebrating Great Writing

Category: chitra singh

दिल के उजले कागज़ पर हम कैसा गीत लिखेंबोलो तुमको ग़ैर लिखें या अपना मीत लिखें नीले अम्बर की अंगनाई में तारों के फूलमेरे प्यासे होटों पर है अंगारों के फूलइन फूलों को आख़िर अपनी हार या जीत लिखें कोई पुराना…

सफ़र में धूप तो होगी जो चल सको तो चलो सभी हैं भीड़ में तुम भी निकल सको तो चलो किसी के वास्ते राहें कहाँ बदलती हैं तुम अपने आप को ख़ुद ही बदल सको तो चलो यहाँ किसी को…

जब दूरियों की आग दिलों को जलाएगी जिस्मों को चाँदनी में भिगोया करेंगे हम बिन कर हर एक बज़्म का मौज़ू-ए-गुफ़्तुगू शे’रों में तेरे ग़म को समोया करेंगे हम मजबूरियों के ज़हर से कर लेंगे ख़ुद-कुशी ये बुज़दिली का जुर्म…

जब तेरा नाम प्यार से लिखती हैं ऊँगलियाँमेरी तरफ़ ज़माने की उठती हैं ऊँगलियाँ दामन सनम का हाथ में आया था एक पलदिन रात उस ही पल से महकती हैं ऊँगलियाँ जिस दिन से दूर हो गए उस दिन से ही सनमबस…

दिल की दीवार-ओ-दर पे क्या देखाबस तेरा नाम ही लिखा देखा तेरी आँखों में हमने क्या देखाकभी क़ातिल कभी ख़ुदा देखा अपनी सूरत लगी पराई सीजब कभी हमने आईना देखा हाय अंदाज़ तेरे रुकने कावक़्त को भी रुका रुका देखा…

दिन गुज़र गया ऐतबार मेंरात कट गयी इंतज़ार में (ऐतबार = भरोसा, विश्वास) वो मज़ा कहाँ वस्ल-ए-यार मेंलुत्फ़ जो मिला इंतज़ार में (वस्ल-ए-यार = प्रिय से मिलन) उनकी इक नज़र, काम कर गयीहोश अब कहाँ होशियार में मेरे कब्ज़े में…

उस मोड़ से शुरू करें फिर ये ज़िन्दगीहर शय जहाँ हसीन थी, हम तुम थे अजनबी लेकर चले थे हम जिन्हें जन्नत के ख़्वाब थेफूलों के ख़्वाब थे वो मुहब्बत के ख़्वाब थेलेकिन कहाँ है इनमें वो, पहली सी दिलकशीउस…

बेबसी जुर्म है हौसला जुर्म हैज़िंदगी तेरी इक-इक अदा जुर्म है ऐ सनम तेरे बारे में कुछ सोचकरअपने बारे में कुछ सोचना जुर्म है याद रखना तुझे मेरा इक जुर्म थाभूल जाना तुझे दूसरा जुर्म है क्या सितम है के तेरे…

दिल के उजले कागज़ पर हम कैसा गीत लिखेंबोलो तुमको ग़ैर लिखें या अपना मीत लिखें नीले अम्बर की अंगनाई में तारों के फूलमेरे प्यासे होटों पर है अंगारों के फूलइन फूलों को आख़िर अपनी हार या जीत लिखें कोई पुराना…

किसी के वास्ते राहें कहाँ बदलती हैंतुम अपने आप को ख़ुद ही बदल सको तो चलो यहाँ किसी को कोई रास्ता नहीं देतामुझे गिराके अगर तुम सम्भल सको तो चलो यही है ज़िन्दगी कुछ ख़्वाब चन्द उम्मीदेंइन्हीं खिलौनों से तुम…

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