Celebrating Great Writing

Author: shajarekhwab

जो मेरा दोस्त भी है, मेरा हमनवा भी हैवो शख्स, सिर्फ भला ही नहीं, बुरा भी है मैं पूजता हूँ जिसे, उससे बेनियाज़ भी हूँमेरी नज़र में वो पत्थर भी है खुदा भी है सवाल नींद का होता तो कोई…

अब के हम बिछड़े तो शायद कभी ख़्वाबों में मिलेंजिस तरह सूखे हुए फूल किताबों में मिलें तू ख़ुदा है न मेरा इश्क़ फ़रिश्तों जैसादोनों इंसाँ हैं तो क्यों इतने हिजाबों में मिलें (हिजाबों = पर्दों) ढूँढ उजड़े हुए लोगों…

चांद का ख्वाब उजालों की नज़र लगता हैतू जिधर हो के गुज़र जाए खबर लगता है। उस की यादों ने उगा रखे हैं सूरज इतनेशाम का वक्त भी आए तो सहर लगता है एक मंज़र पे ठहरने नहीं देती फ़ितरतउम्र…

जिसे ना हुस्न से मतलब ना इश्क़ से सरोकारवो शख्स मुझ को बहुत बदनसीब लगता है हदूद-ए-जात से बाहर निकल के देख ज़राना कोई गैर, ना कोई रक़ीब लगता है ये दोस्ती, ये मरासिम, ये चाहते ये खुलूसकभी कभी ये…

मंज़िल पे न पहुंचे उसे रस्ता नहीं कहतेदो-चार कदम चलने को चलना नहीं कहते एक हम हैं कि ग़ैरों को भी कह देते हैं अपनाएक तुम हो कि अपनों को भी अपना नहीं कहते कम हिम्मती, ख़तरा है समंदर के…

आओ घास पे सभा जमाएँ मय-ख़ाना तो बंद पड़ा है फूल तो सारे झड़ गए लेकिन तेरी याद का ज़ख़्म हरा है तू ने जितना प्यार किया था दुख भी मुझे उतना ही दिया है ये भी है एक तरह…

हवा खुद अब के हवा के खिलाफ है, जानीदिए जलाओ के मैदान साफ़ है, जानी हमे चमकती हुई सर्दियों का खौफ नहींहमारे पास पुराना लिहाफ है, जानी वफ़ा का नाम यहाँ हो चूका बहुत बदनाममैं बेवफा हूँ मुझे ऐतराफ है,…

दिल के उजले कागज़ पर हम कैसा गीत लिखेंबोलो तुमको ग़ैर लिखें या अपना मीत लिखें नीले अम्बर की अंगनाई में तारों के फूलमेरे प्यासे होटों पर है अंगारों के फूलइन फूलों को आख़िर अपनी हार या जीत लिखें कोई पुराना…

तेरा चेहरा सुब्ह का तारा लगता हैसुब्ह का तारा कितना प्यारा लगता है तुम से मिल कर इमली मीठी लगती हैतुम से बिछड़ कर शहद भी खारा लगता है रात हमारे साथ तू जागा करता हैचाँद बता तू कौन हमारा…

आओ साथी जी लेते हैंविष हो या अमृत हो जीवनसहज भाव से पी लेते हैं सघन कंटकों भरी डगर हैहर प्रवाह के साथ भँवर हैआगे हैं संकट अनेक, परपीछे हटना भी दुष्कर है।विघ्नों के इन काँटों से हीघाव हृदय के…

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