Celebrating Great Writing

Author: shajarekhwab

यूँ तो आपस में बिगड़ते हैं ख़फ़ा होते हैंमिलने वाले कहीं उल्फ़त में जुदा होते हैं हैं ज़माने में अजब चीज़ मोहब्बत वालेदर्द ख़ुद बनते हैं ख़ुद अपनी दवा होते हैं हाल-ए-दिल मुझ से न पूछो मिरी नज़रें देखोराज़ दिल…

इस बार मिले हैं ग़म, कुछ और तरह से भीआँखें है हमारी नम, कुछ और तरह से भी शोला भी नहीं उठता, काजल भी नहीं बनताजलता है किसी का ग़म, कुछ और तरह से भी हर शाख़ सुलगती है, हर…

ये न थी हमारी क़िस्मत, के विसाल-ए-यार होताअगर और जीते रहते यही इंतिज़ार होता तेरे वादे पे जिए हम, तो ये जान झूट जानाके ख़ुशी से मर न जाते, अगर एतबार होता तेरी नाज़ुकी से जाना के बंधा है एहद-ए-बूदाकभी…

इस उम्मीद पे रोज़ चराग़ जलाते हैंआने वाले बरसों ब’अद भी आते हैं हम ने जिस रस्ते पर उस को छोड़ा हैफूल अभी तक उस पर खिलते जाते हैं दिन में किरनें आँख-मिचोली खेलती हैंरात गए कुछ जुगनू मिलने जाते…

जिस्म पर बाक़ी ये सर है क्या करूँदस्त-ए-क़ातिल बे-हुनर है क्या करूँ (दस्त-ए-क़ातिल = क़ातिल का हाथ) चाहता हूँ फूँक दूँ इस शहर कोशहर में इन का भी घर है क्या करूँ वो तो सौ सौ मर्तबा चाहें मुझेमेरी चाहत…

बेबसी जुर्म है हौसला जुर्म हैज़िंदगी तेरी इक-इक अदा जुर्म है ऐ सनम तेरे बारे में कुछ सोचकरअपने बारे में कुछ सोचना जुर्म है याद रखना तुझे मेरा इक जुर्म थाभूल जाना तुझे दूसरा जुर्म है क्या सितम है के…

जाते जाते वो मुझे अच्छी निशानी दे गयाउम्र भर दोहराऊँगा ऐसी कहानी दे गया उससे मैं कुछ पा सकूँ ऐसी कहाँ उम्मीद थीग़म भी वो शायद बरा-ए-मेहरबानी दे गया सब हवायें ले गया मेरे समंदर की कोईऔर मुझ को एक…

मिरी ज़बाँ पे नए ज़ाइक़ों के फल लिख देमिरे ख़ुदा तू मिरे नाम इक ग़ज़ल लिख दे मैं चाहता हूँ ये दुनिया वो चाहता है मुझेये मसअला बड़ा नाज़ुक है कोई हल लिख दे ये आज जिस का है उस…

गरज बरस प्यासी धरती पर फिर पानी दे मौलाचिड़ियों को दाना, बच्चों को गुड़धानी दे मौला दो और दो का जोड़ हमेशा चार कहाँ होता हैसोच समझवालों को थोड़ी नादानी दे मौला फिर रोशन कर ज़हर का प्याला चमका नई…

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