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Sun li Jo khuda ne vo dua tum to nahi Bashir Badr

Sun li Jo khuda ne vo dua tum to nahi Bashir Badr

सुन ली जो ख़ुदा ने वो दुआ तुम तो नहीं हो
दरवाज़े पे दस्तक की सदा तुम तो नहीं हो

(सदा = आवाज़)

महसूस किया तुम को तो गीली हुईं पलकें
भीगे हुए मौसम की अदा तुम तो नहीं हो

अन्जानी सी राहों में नहीं कोई भी मेरा
किस ने मुझे यूँ अपना कहा तुम तो नहीं हो

दुनिया को बहरहाल गिले शिकवे रहेंगे
दुनिया की तरह मुझ से ख़फ़ा तुम तो नहीं हो

सिमटी हुई शर्माई हुई रात की रानी
सोई हुई कलियों की हया तुम तो नहीं हो

-बशीर बद्र

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shajarekhwab

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