Celebrating Great Writing

Remembering Jagjit Singh and Nida Fazli

Remembering Jagjit Singh and Nida Fazli

निदा फाजली उर्दू और हिंदी दुनिया के अजीम शायरों और गीतकारों में आज भी शुमार हैं. उनके गीत काफी सरल माने जाते हैं, जो हर एक की जुबान पर चढ़े रहते थे. ऐसी ही खासियत थी गज़ल गायक जगजीत साहब में. एक दौर था जब गजल सुनने वाले लोग चुनिंदा थे, आम लोगों के लिए इसे सुनना और समझना आसान नहीं था. उस दौर में जगजीत सिंह की आवाज के जादू ने इसे हर दिल अज़ीज बना दिया. दोनों फ़नकारों को  हर तबके से प्यार मिला और आज भी मिल रहा है और मिलता रहेगा……..एक हमारी पसंद की ग़ज़ल आज दोनों हस्ती को याद करने केे लिए पेश है आप सबके लिए ……..

कहीं-कहीं से हर चेहरा तुम जैसा लगता है
तुम को भूल न पायेंगे हम, ऐसा लगता है

ऐसा भी इक रंग है जो करता है बातें भी
जो भी इसको पहन ले वो अपना-सा लगता है

और तो सब कुछ ठीक है लेकिन कभी-कभी यूँ ही
चलता-फिरता शहर अचानक तनहा लगता है

अब भी यूँ मिलते हैं हमसे फूल चमेली के
जैसे इनसे अपना कोई रिश्ता लगता है

तुम क्या बिछड़े भूल गये रिश्तों की शराफ़त हम
जो भी मिलता है कुछ दिन ही अच्छा लगता है

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shajarekhwab

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