Celebrating Great Writing

अकेले हैं वो और झुँझला रहे हैं मिरी याद से जंग फ़रमा रहे हैं ये कैसी हवा-ए-तरक़्क़ी चली है दिए तो दिए दिल बुझे जा रहे हैं इलाही मिरे दोस्त हों ख़ैरियत से ये क्यूँ घर में पत्थर नहीं आ…

#Bashir_Badr🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷 है अजीब शहर की ज़िंदगी न सफ़र रहा न क़याम है कहीं कारोबार सी दोपहर कहीं बद-मिज़ाज सी शाम है यूँही रोज़ मिलने की आरज़ू बड़ी रख-रखाव की गुफ़्तुगू ये शराफ़तें नहीं बे-ग़रज़ इसे आप से कोई काम है…

मैं ढूँडता हूँ जिसे वो जहाँ नहीं मिलता नई ज़मीन नया आसमाँ नहीं मिलता नई ज़मीन नया आसमाँ भी मिल जाए नए बशर का कहीं कुछ निशाँ नहीं मिलता वो तेग़ मिल गई जिस से हुआ है क़त्ल मिरा किसी…

हिज्र की पहली शाम के साये दूर उफ़क़ तक छाये थे

हिज्र* की पहली शाम के साये दूर उफ़क़* तक छाये थे हम जब उसके शहर से निकले सब रास्ते सँवलाये थे जाने वो क्या सोच रहा था अपने दिल में सारी रात प्यार की बातें करते करते उस के नैन…

किस बाज़ार में मिलता है पता है तुम्हें क्या जो दरख़्तों में रिसता है बरसात का पानी और भर जाता है आँखों में  धीरे धीरे याद बन कर ना छलकता है ना दिखता है बस धीमी धीमी सी साँसे लेता…

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