Celebrating Great Writing

Na rava kahiye na Saza kahiye Dagh Dehlvi

Na rava kahiye na Saza kahiye Dagh Dehlvi

ना-रवा कहिए ना-सज़ा कहिए

कहिए कहिए मुझे बुरा कहिए

तुझ को बद-अहद ओ बेवफ़ा कहिए

ऐसे झूटे को और क्या कहिए

दर्द दिल का न कहिए या कहिए

जब वो पूछे मिज़ाज क्या कहिए

फिर न रुकिए जो मुद्दआ कहिए

एक के बा’द दूसरा कहिए

आप अब मेरा मुँह न खुलवाएँ

ये न कहिए कि मुद्दआ कहिए

वो मुझे क़त्ल कर के कहते हैं

मानता ही न था ये क्या कहिए

दिल में रखने की बात है ग़म-ए-इश्क़

इस को हरगिज़ न बरमला कहिए

तुझ को अच्छा कहा है किस किस ने

कहने वालों को और क्या कहिए

वो भी सुन लेंगे ये कभी न कभी

हाल-ए-दिल सब से जा-ब-जा कहिए

मुझ को कहिए बुरा न ग़ैर के साथ

जो हो कहना जुदा जुदा कहिए

इंतिहा इश्क़ की ख़ुदा जाने

दम-ए-आख़िर को इब्तिदा कहिए

Please follow and like us:
error

shajarekhwab

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top