Celebrating Great Writing

Masjido par Jan di kurba shivalo par hue Rajesh reddy

मस्जिदों पर जान दी कुर्बां शिवालों पर हुए
कितने काले तजरूबे उजली किताबों पर हुए

सर तलक तो बाद में आई मेरे दुश्मन की तेग़
उससे पहले अनगिनत हमले ख़यालों पर हुए

(तेग़ = तलवार)

फ़ायदे-नुकसान में हमने न उलझाया दिमाग़
अपने सारे फ़ैसले दिल के इशारों पर हुए

तू जवाबों से हमारे मुतमइन हो या न हो
हम फ़िदा ए ज़िन्दगी ! तेरे सवालों पर हुए

(मुतमइन = संतुष्ट)

अब तलक तो कम न कर पाए ज़मीं के दर्द को
तजरूबे जो आसमाँ के चाँद-तारों पर हुए

-राजेश रेड्डी

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shajarekhwab

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