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jo meri chhat ka rasta chand ne dekha nahi hota Chitransh khare

jo meri chhat ka rasta chand ne dekha nahi hota Chitransh khare

जो मेरी छत का रस्ता चाँद ने देखा नही होता
तो शायद चाँदनी लेकर यहाँ उतरा नही होता

दुआयें दो तुम्हे मशहूर हमने कर दिया वरना
नजर अंदाज कर देते तो ये जलवा नहीं होता

अभी तो और भी मौसम पडे़ है मेरे साये में
मैं बरगद का शजर हूँ मुद्दतों बूढा नही होता

हसीनों से तमन्नाये वफा कमजर्फ रखते हैं
ये एैसा ख्वाब है जो उम्र भर पूरा नही होता

बड़े अहसान हैं मुझपर तेरी मासूम यादों के
मैं तनहा रास्तो मैं भी कभी तनहा नही होता

मैं जब-जब शेर की गहराइयो में डुब जाता हूँ
सिवा तेरे मेरे दिल में कोई चेहरा नही होता

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shajarekhwab

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