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Holi par shayari

Holi par shayari

तेरे गालों पे जब गुलाल गुलाल लगा
ये जहां मुझ को लाल लाल लगा
– नासिर अमरोहवी


बादल आए हैं घिर गुलाल के लाल
कुछ किसी का नहीं किसी को ख़याल
– रंगीन सआदत यार ख़ां

पूरा करेंगे होली में क्या वादा-ए-विसाल
जिन को अभी बसंत की ऐ दिल ख़बर नहीं
– कल्ब-ए-हुसैन नादिर


होली के अब बहाने छिड़का है रंग किस ने
नाम-ए-ख़ुदा तुझ ऊपर इस आन अजब समां है
– शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

सहज याद आ गया वो लाल होली-बाज़ जूं दिल में
गुलाली हो गया तन पर मिरे ख़िर्क़ा जो उजला था
– वली उज़लत


वो तमाशा ओ खेल होली का
सब के तन रख़्त-ए-केसरी है याद
– फ़ाएज़ देहलवी

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