Celebrating Great Writing

diya tera mera Prathmesh Mairal

diya tera mera Prathmesh Mairal

एक दिया उस घर जलाएं
जहां रहता फौजी रणबांकुरा हो  वो सरहद पर मुस्तैद रहे
पर उसके घर हमारा पहरा हो।

कुछ दिए अपने हिस्से के जरूरतमंदों को “प्रथमेश” दे आएँ
उनके घर भी दिवाली का उजियारा हो।

एक दिया मेरे मंदिर एक तेरी मस्जिद पर रख आएँ
मोहब्बत के उजालों का वहां भरपूर बसेरा हो।

एक-एक दिया हमारे अंदर में जलाएं
दूर अज्ञान का घेरा हो ।
बाहर के तूफान हमें जुदा ना करें
रिश्ता इतना गहरा हो।

Please follow and like us:
error

shajarekhwab

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top