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Dil kab khayal-e-yaar se khali raha mira Rajesh Reddy

Dil kab khayal-e-yaar se khali raha mira Rajesh Reddy

दिल कब ख़याल-ए-यार से ख़ाली रहा मिरा
मुझमें वजूद ही कहाँ बाक़ी रहा मिरा

मुम्किन है मुस्कुराने से तस्कीन कुछ मिले
रोने का तजरबा तो बुरा ही रहा मिरा

बस आईने की आँख में देखी कभी न दाद
दुनिया में वैसे नाम तो काफ़ी रहा मिरा

फरहाद नाम था कभी मजनूँ था मेरा नाम
हर अह्द में नसीब जुदाई रहा मिरा

चारागर आए और गए करके तजरबे
वो ज़ख़्म जो हरा था हरा ही रहा मिरा

हर बार जीत कर भी मिरी हार ही हुई
हर बार सामने कोई भाई रहा मिरा

कुछ दूर तक तो नाख़ुदा लेकर गया मुझे
फिर आख़री सहारा भँवर ही रहा मिर

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shajarekhwab

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