Celebrating Great Writing

Category: young shayar

जीत की और न हार की ज़िद है दिल को शायद क़रार की ज़िद है कोई भी तो नहीं तआ’क़ुब में जाने किस से फ़रार की ज़िद है हम से कुछ कह रहे हैं सन्नाटे पर हमें इंतिज़ार की ज़िद…

दीवारें छोटी होती थीं लेकिन पर्दा होता था ताले की ईजाद से पहले सिर्फ़ भरोसा होता था कभी कभी आती थी पहले वस्ल की लज़्ज़त अंदर तक बारिश तिरछी पड़ती थी तो कमरा गीला होता था शुक्र करो तुम इस…

अक़्ल तो कहती है अब के उस से अच्छा ढूँड लूँ है मगर दिल की ये ज़िद फिर उस के जैसा ढूँड लूँ इस से मेरे प्यास की शिद्दत में आएगी कमी में अगर ख़ुद से ज़ियादा कोई प्यासा ढूँड…

इस एक डर से ख़्वाब देखता नहीं जो देखता हूँ मैं वो भूलता नहीं किसी मुंडेर पर कोई दिया जिला फिर इस के बाद क्या हुआ पता नहीं मैं आ रहा था रास्ते मैं फूल थे मैं जा रहा हूँ…

इस क़दर टूट के तुम पे हमें प्यार आता है अपनी बाँहों में भरें मार ही डालें तुम को कभी ख़्वाबों की तरह आँख के पर्दे में रहो कभी ख़्वाहिश की तरह दिल में बुला लें तुम को है तुम्हारे…

क़िस्मत अपनी ऐसी कच्ची निकली है हर महफ़िल से बस तन्हाई निकली है ख़त उस के जब आज जलाने बैठा तो माचिस की तीली भी सीली निकली है शोर-शराबा रहता था जिस आँगन में आज वहाँ से बस ख़ामोशी निकली…

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