Celebrating Great Writing

Category: waseem barelvi

मैं अपने ख्व़ाब से बिछडा नज़र नहीं आतातो इस सदी में अकेला नज़र नहीं आता अजब दबाव है इन बाहरी हवाओं काघरों का बोझ भी उठता नज़र नहीं आता मैं तेरी राह से हटने को हट गया लेकिनमुझे तो कोई…

उदास एक मुझी को तो कर नही जातावह मुझसे रुठ के अपने भी घर नही जाता वह दिन गये कि मुहबबत थी जान की बाज़ीकिसी से अब कोई बिछडे तो मर नही जाता तुमहारा प्यार तो सांसों मे सांस लेता…

आँखों आँखों रहे और कोई घर न होख्व़ाब जैसा किसी का मुकद्दर न हो क्या तमन्ना है रौशन तो सब हो मगरकोई मेरे चराग़ों से बढ कर न हो रौशनी है तो किस काम की रौशनीआँख के पास जब कोई…

हवेलियों में मिरी तर्बियत नहीं होती तो आज सर पे टपकने को छत नहीं होती हमारे घर का पता पूछने से क्या हासिल उदासियों की कोई शहरियत नहीं होती चराग़ घर का हो महफ़िल का हो कि मंदिर का हवा…

वो मुझ को क्या बताना चाहता है जो दुनिया से छुपाना चाहता है मुझे देखो कि मैं उस को ही चाहूँ जिसे सारा ज़माना चाहता है क़लम करना कहाँ है उस का मंशा वो मेरा सर झुकाना चाहता है शिकायत…

चलो हम ही पहल कर दें कि हम से बद-गुमाँ क्यूँ हो कोई रिश्ता ज़रा सी ज़िद की ख़ातिर राएगाँ क्यूँ हो मैं ज़िंदा हूँ तो इस ज़िंदा-ज़मीरी की बदौलत ही जो बोले तेरे लहजे में भला मेरी ज़बाँ क्यूँ…

उड़ान वालो उड़ानों पे वक़्त भारी हैपरों की अब के नहीं हौसलों की बारी है मैं क़तरा हो के तूफानों से जंग लड़ता हूँमुझे बचाना समंदर की ज़िम्मेदारी है कोई बताये ये उसके ग़ुरूर-ए-बेजा कोवो जंग हमने लड़ी ही नहीं…

आंख कहे दिन निकला है,दिन ये कहे है रातभला मैं मानूं किस की बात मंदिर चुप है मस्जिद चुप है,नफरत बोल रही हैऔर सियासत ज़हर कहां तक पहुंचा,तौल रही हैकुछके लिए ये आग का मौसम, कुछ के लिए बरसातभला मैं…

अच्छा है जो मिला वह कहीं छूटता गयामुड़ मुड़ के ज़िन्दगी की तरफ देखना गया मैं खाली ज़ेब सब की निगाहों में आ गयासड़कों पे भीख मांगने वालों का क्या गया जाना ही था तो जाता उसे इख़्तियार थाजाते हुए…

वो मुझ को क्या बताना चाहता है जो दुनिया से छुपाना चाहता है मुझे देखो कि मैं उस को ही चाहूँ जिसे सारा ज़माना चाहता है क़लम करना कहाँ है उस का मंशा वो मेरा सर झुकाना चाहता है शिकायत…

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