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जो मेरी छत का रस्ता चाँद ने देखा नही होतातो शायद चाँदनी लेकर यहाँ उतरा नही होता दुआयें दो तुम्हे मशहूर हमने कर दिया वरनानजर अंदाज कर देते तो ये जलवा नहीं होता अभी तो और भी मौसम पडे़ है…

आज जाने की ज़िद न करो यूँ ही पहलू में बैठे रहो आज जाने की ज़िद न करो हाए मर जाएँगे, हम तो लुट जाएँगे ऐसी बातें किया न करो आज जाने की ज़िद न करो तुम ही सोचो ज़रा…

थोड़ी मस्ती थोड़ा सा ईमान बचा पाया हूँये क्या कम है मैं अपनी पहचान बचा पाया हूँ मैंने सिर्फ उसूलों के बारे में सोचा भर थाकितनी मुश्किल से मैं अपनी जान बचा पाया हूँ कुछ उम्मीदें, कुछ सपने, कुछ महकी-महकी…

जो तू ही सनम हम से बेज़ार होगातो जीना हमें अपना दुशवार होगा ग़म-ए-हिज्र रखेगा बेताब दिल कोहमें कुढ़ते-कुढ़ते कुछ आज़ार होगा जो अफ़्रात-ए-उल्फ़त है ऐसा तो आशिक़कोई दिन में बरसों का बिमार होगा उचटती मुलाक़ात कब तक रहेगीकभू तो…

बस-कि दुश्वार है हर काम का आसाँ होना आदमी को भी मयस्सर नहीं इंसाँ होना गिर्या चाहे है ख़राबी मिरे काशाने की दर ओ दीवार से टपके है बयाबाँ होना वा-ए-दीवानगी-ए-शौक़ कि हर दम मुझ को आप जाना उधर और…

इस क़दर टूट के तुम पे हमें प्यार आता है अपनी बाँहों में भरें मार ही डालें तुम को कभी ख़्वाबों की तरह आँख के पर्दे में रहो कभी ख़्वाहिश की तरह दिल में बुला लें तुम को है तुम्हारे…

छोड़ भी देखे हुए को, इक नया मंज़र निकालजो तिरी आँखों के अंदर है उसे बाहर निकाल ना-मुकम्मल है दिखाई दे रहा है जो तुझेडूब कर मंज़र की गहराई में,पस-मंज़र निकाल तेरी ये दुनिया तो हमने देख ली परवरदिगार !अब…

वो जो पाज़ेब की झंकार का शैदाई हो उस को तलवार की झंकार से डर लगता है मुझ को बालों की सफ़ेदी ने ख़बर-दार किया ज़िंदगी अब तिरी रफ़्तार से डर लगता है कर दें मस्लूब उन्हें लाख ज़माने वाले…

जब न तब जागह से तुम जाया किए हम तो अपनी ओर से आए बहुत दैर से सू-ए-हरम आया न टुक हम मिज़ाज अपना इधर लाए बहुत फूल गुल शम्स ओ क़मर सारे ही थे पर हमें इन में तुम्हीं…

जिन्दगी तुझको जिया है कोई अफ़सोस नहीं,ज़हर ख़ुद मैंने पिया है कोई अफ़सोस नहीं मैंने मुजरिम को भी मुजरिम न कहा दुनिया में,बस यही जुर्म किया है कोई अफ़सोस नहीं मेरी क़िस्मत में जो लिखे थे उन्ही काँटों से,दिल के…

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