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Category: tanhai

मैं ख़ुद हूँ कहीं और दिल-ए-ग़म-दीदा कहीं और जज़्बात में एहसास में इक बर्फ़ जमी है ख़्वाबों के दरीचे से जो झाँका है किसी ने दिल ने कहीं सीने में कोई आह भरी है तस्वीर-ए-ग़म-ओ-दर्द बनी जाती हूँ अब तो…

अक्स कितने उतर गए मुझ में फिर न जाने किधर गए मुझ में मैं ने चाहा था ज़ख़्म भर जाएँ ज़ख़्म ही ज़ख़्म भर गए मुझ में मैं वो पल था जो खा गया सदियाँ सब ज़माने गुज़र गए मुझ…

सोज़े-ग़म देके उसने ये इरशाद कियाजा तुझे कश्मकश-ए-दहर से आज़ाद किया (सोज़े-ग़म दुःख की जलन), (इरशाद = आदेश, हुक्म),  (दहर = ज़माना, समय, युग) वो करें भी तो किन अल्फ़ाज में तिरा शिकवाजिनको तिरी निगाह-ए-लुत्फ़ ने बर्बाद किया दिल की चोटों…

ईद का चांद हो गया है कोईजाने किस देस जा बसा है कोई पूछता हूं मैं सारे रस्तों सेउस के घर का भी रास्ता है कोई एक दिन मैं ख़ुदा से पूछूं गाक्या ग़रीबों का भी ख़ुदा है कोई इक…

चाँद तारे शफ़क़ धनक आकाश इन दरीचों को कुंजियाँ दे दो ग़ज़लें बे-कैफ़ हो रही हैं मिरी अपने होंटों की सुर्ख़ियाँ दे दो क्या करोगे निशानियाँ रख कर इन हवाओं को छुट्टियाँ दे दो हिचकियाँ रात दर्द तन्हाई आ भी…

उस की हसरत है जिसे दिल से मिटा भी न सकूँ ढूँडने उस को चला हूँ जिसे पा भी न सकूँ डाल के ख़ाक मेरे ख़ून पे क़ातिल ने कहा कुछ ये मेहंदी नहीं मेरी कि छुपा भी न सकूँ…

आज हमें ये बात समझ में आई है तुम मौसम हो और मौसम हरजाई है तू ने कैसे मोड़ पे छोड़ दिया मुझ को दिल की बात छुपाऊँ तो रुस्वाई है तेरे बाद बचा है क्या जीवन में मिरे मैं…

मैं कब तन्हा हुआ था याद होगा तुम्हारा फ़ैसला था याद होगा बहुत से उजले उजले फूल ले कर कोई तुम से मिला था याद होगा बिछी थीं हर तरफ़ आँखें ही आँखें कोई आँसू गिरा था याद होगा उदासी…

सिलसिला मेरे सफ़र का कभी टूटा ही नहीं मैं किसी मोड़ पे दम लेने को ठहरा ही नहीं ख़ुश्क होंटों के तसव्वुर से लरज़ने वालो तुम ने तपता हुआ सहरा कभी देखा ही नहीं अब तो हर बात पे हँसने…

दर्द हल्का है साँस भारी है जिए जाने की रस्म जारी है आप के ब’अद हर घड़ी हम ने आप के साथ ही गुज़ारी है रात को चाँदनी तो ओढ़ा दो दिन की चादर अभी उतारी है शाख़ पर कोई…

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