Celebrating Great Writing

Category: Sudarshan Faakir

दिल के दीवार-ओ-दर पे क्या देखा बस तिरा नाम ही लिखा देखा तेरी आँखों में हम ने क्या देखा कभी क़ातिल कभी ख़ुदा देखा अपनी सूरत लगी पराई सी जब कभी हम ने आईना देखा हाए अंदाज़ तेरे रुकने का…

सामने है जो उसे लोग बुरा कहते हैं जिस को देखा ही नहीं उस को ख़ुदा कहते हैं ज़िंदगी को भी सिला कहते हैं कहने वाले जीने वाले तो गुनाहों की सज़ा कहते हैं फ़ासले उम्र के कुछ और बढ़ा…

आज तुम से बिछड़ रहा हूँ मैंआज कहता हूँ फिर मिलूँगा तुम्हेंतुम मेरा इंतज़ार करती रहोआज का ऐतबार करती रहो लोग कहते हैं वक़्त चलता हैऔर इंसान भी बदलता हैकाश रुक जाये वक़्त आज की रातऔर बदले न कोई आज…

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