Celebrating Great Writing

Category: Sudarshan Faakir

कुछ तो दुनिया कि इनायात ने दिल तोड़ दियाऔर कुछ तल्ख़ी-ए-हालात ने दिल तोड़ दिया हम तो समझे थे के बरसात में बरसेगी शराबआयी बरसात तो बरसात ने दिल तोड़ दिया दिल तो रोता रहे, ओर आँख से आँसू न…

ढल गया आफ़ताब ऐ साक़ीला पिला दे शराब ऐ साक़ी या सुराही लगा मेरे मुँह सेया उलट दे नक़ाब ऐ साक़ी मैकदा छोड़ कर कहाँ जाऊँहै ज़माना ख़राब ऐ साक़ी जाम भर दे गुनाहगारों केये भी है इक सवाब ऐ…

कुछ तो दुनिया की इनायात ने दिल तोड़ दिया और कुछ तल्ख़ी-ए-हालात ने दिल तोड़ दिया हम तो समझे थे के बरसात में बरसेगी शराब आई बरसात तो बरसात ने दिल तोड़ दिया दिल तो रोता रहे ओर आँख से…

हम तो यूँ अपनी ज़िन्दगी से मिलेअजनबी जैसे अजनबी से मिले हर वफ़ा एक जुर्म हो गोयादोस्त कुछ ऐसी बेरुख़ी से मिले (गोया = मानो, जैसे) फूल ही फूल हम ने माँगे थेदाग़ ही दाग़ ज़िन्दगी से मिले जिस तरह…

मिरी ज़बाँ से मिरी दास्ताँ सुनो तो सही यक़ीं करो न करो मेहरबाँ सुनो तो सही चलो ये मान लिया मुजरिम-ए-मोहब्बत हैं हमारे जुर्म का हम से बयाँ सुनो तो सही बनोगे दोस्त मिरे तुम भी दुश्मनो इक दिन मिरी…

दिल के दीवार-ओ-दर पे क्या देखा बस तिरा नाम ही लिखा देखा तेरी आँखों में हम ने क्या देखा कभी क़ातिल कभी ख़ुदा देखा अपनी सूरत लगी पराई सी जब कभी हम ने आईना देखा हाए अंदाज़ तेरे रुकने का…

सामने है जो उसे लोग बुरा कहते हैं जिस को देखा ही नहीं उस को ख़ुदा कहते हैं ज़िंदगी को भी सिला कहते हैं कहने वाले जीने वाले तो गुनाहों की सज़ा कहते हैं फ़ासले उम्र के कुछ और बढ़ा…

आज तुम से बिछड़ रहा हूँ मैंआज कहता हूँ फिर मिलूँगा तुम्हेंतुम मेरा इंतज़ार करती रहोआज का ऐतबार करती रहो लोग कहते हैं वक़्त चलता हैऔर इंसान भी बदलता हैकाश रुक जाये वक़्त आज की रातऔर बदले न कोई आज…

Back to top