दिल के बहलाने की तदबीर तो है तू नहीं है तिरी तस्वीर तो है हम-सफ़र छोड़ गए मुझ को तो क्या साथ मेरे मिरी तक़दीर तो है क़ैद से छूट के भी क्या पाया आज भी पाँव में ज़ंजीर तो…