Celebrating Great Writing

Category: Ramdhari Singh Dinkar

प्रिय की पृथुल जाँघ पर लेटी करती थीं जो रंगरलियाँ,उनकी कब्रों पर खिलती हैं नन्हीं जूही की कलियाँ। पी न सका कोई जिनके नव अधरों की मधुमय प्याली,वे भौरों से रूठ झूमतीं बन कर चम्पा की डाली। तनिक चूमने से…

पीसा जाता जब इक्षु-दण्ड,झरती रस की धारा अखण्ड,मेंहदी जब सहती है प्रहार,बनती ललनाओं का सिंगारजब फूल पिरोये जाते हैं,हम उनको गले लगाते हैं। वसुधा का नेता कौन हुआ?भूखण्ड-विजेता कौन हुआ?अतुलित यश क्रेता कौन हुआ?नव-धर्म प्रणेता कौन हुआ?जिसने न कभी आराम…

स्वातन्त्रय जाति की लगन व्यक्ति की धुन है,बाहरी वस्तु यह नहीं भीतरी गुण है !वीरत्व छोड़ पर का मत चरण गहो रेजो पड़े आन खुद ही सब आग सहो रे! जब कभी अहम पर नियति चोट देती है,कुछ चीज़ अहम से…

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