Celebrating Great Writing

Category: Rajesh Reddy

दिल कब ख़याल-ए-यार से ख़ाली रहा मिरामुझमें वजूद ही कहाँ बाक़ी रहा मिरा मुम्किन है मुस्कुराने से तस्कीन कुछ मिलेरोने का तजरबा तो बुरा ही रहा मिरा बस आईने की आँख में देखी कभी न दाददुनिया में वैसे नाम तो…

जिस को भी देखो तिरे दर का पता पूछता है क़तरा क़तरे से समुंदर का पता पूछता है ढूँडता रहता हूँ आईने में अक्सर ख़ुद को मेरा बाहर मिरे अंदर का पता पूछता है ख़त्म होते ही नहीं संग किसी…

क्या इक दरिया अपना पानी चुन सकता हैपानी भी क्या अपनी रवानी चुन सकता है जीना है दुनिया में दुनिया की शर्तों परकौन क़फ़स में दाना-पानी चुन सकता है दिल तो वो दीवाना है जो मह़फ़िल में भीअपनी मर्ज़ी की…

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