Celebrating Great Writing

Category: Rajesh Reddy

पूरा यहाँ का है न मुकम्मल वहाँ का हैये जो मिरा वजूद है जाने कहाँ का हैक़िस्सा ये मुख़्तसर सफ़र-ए-रायगाँ का है हैं कश्तियाँ यक़ीं की समुंदर गुमाँ का है(मुख़्तसर = थोड़ा, कम, संक्षिप्त), (सफ़र-ए-रायगाँ = व्यर्थ का सफ़र), (गुमाँ = गुमान,…

मस्जिदों पर जान दी कुर्बां शिवालों पर हुएकितने काले तजरूबे उजली किताबों पर हुए सर तलक तो बाद में आई मेरे दुश्मन की तेग़उससे पहले अनगिनत हमले ख़यालों पर हुए (तेग़ = तलवार) फ़ायदे-नुकसान में हमने न उलझाया दिमाग़अपने सारे…

दिल कब ख़याल-ए-यार से ख़ाली रहा मिरामुझमें वजूद ही कहाँ बाक़ी रहा मिरा मुम्किन है मुस्कुराने से तस्कीन कुछ मिलेरोने का तजरबा तो बुरा ही रहा मिरा बस आईने की आँख में देखी कभी न दाददुनिया में वैसे नाम तो…

जिस को भी देखो तिरे दर का पता पूछता है क़तरा क़तरे से समुंदर का पता पूछता है ढूँडता रहता हूँ आईने में अक्सर ख़ुद को मेरा बाहर मिरे अंदर का पता पूछता है ख़त्म होते ही नहीं संग किसी…

क्या इक दरिया अपना पानी चुन सकता हैपानी भी क्या अपनी रवानी चुन सकता है जीना है दुनिया में दुनिया की शर्तों परकौन क़फ़स में दाना-पानी चुन सकता है दिल तो वो दीवाना है जो मह़फ़िल में भीअपनी मर्ज़ी की…

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