Celebrating Great Writing

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तेरे गालों पे जब गुलाल गुलाल लगाये जहां मुझ को लाल लाल लगा– नासिर अमरोहवी बादल आए हैं घिर गुलाल के लालकुछ किसी का नहीं किसी को ख़याल– रंगीन सआदत यार ख़ां पूरा करेंगे होली में क्या वादा-ए-विसालजिन को अभी बसंत की ऐ…

मेरी अदबी और ज़ाती जिंदगी दोनों ही सर गर्म थीं। अमृता से मुलाकातों का सिलसिला जारी था। हम जब भी करीब होते, मैंने यह बहुत बार महसूस किया कि अमृता बहुत शिद्दत से मेरे चेहरे, हाथ और उंगलियों पर गौर…

एक पुराने दुःख ने पुछा क्या तुम अभी वहीं रहते हो?उत्तर दिया,चले मत आना मैंने वो घर बदल दिया है वैरागिन बन जाएँ वासना, बना सकेगी नहीं वियोगीसाँसों से आगे जीने की हठ कर बैठा मन का योगीएक पाप ने…

कोई ये कैसे बताए कि वो तन्हा क्यूँ है वो जो अपना था वही और किसी का क्यूँ है यही दुनिया है तो फिर ऐसी ये दुनिया क्यूँ है यही होता है तो आख़िर यही होता क्यूँ है इक ज़रा…

तो तुम्हारे साथ है और कुछ, प्रेम नहीं है मेरा । प्रेम है अगर तो जो कुछ है बेतरतीब मेरा या कुछ कमी, या कुछ भूल ही, रहे असुन्दर, सामने खड़ी हो जाऊँगी, तुम प्यार करोगे । किसने कहा कि…

मैं ने अपना हक़ माँगा था वो नाहक़ ही रूठ गया बस इतनी सी बात हुई थी साथ हमारा छूट गया वो मेरा है आख़िर इक दिन मुझ को मिल ही जाएगा मेरे मन का एक भरम था कब तक…

मेरे ख्यालों में एक विशाल पेड़ हैतुम उसके नीचे बैठनामैं झरूँगा तुमपरबारिश की बूंदों की तरहपेड़ से गिरते पत्तों की तरहहवा की तरह मेरे ख्यालों में एक पहाड़ हैउस पहाड़ के शिखर पर चढ़करहम किसी दिन एक साथ चिल्लाएंगे –प्यारऔर…

तो मैं भी ख़ुश हूँ कोई उस से जा के कह देना अगर वो ख़ुश है मुझे बे-क़रार करते हुए तुम्हें ख़बर ही नहीं है कि कोई टूट गया मोहब्बतों को बहुत पाएदार करते हुए मैं मुस्कुराता हुआ आइने में…

क्या तुम जानते हो पुरुष से भिन्नएक स्त्री का एकांत घर-प्रेम और जाति से अलगएक स्त्री को उसकी अपनी ज़मीनके बारे में बता सकते हो तुम । बता सकते होसदियों से अपना घर तलाशतीएक बेचैन स्त्री कोउसके घर का पता…

आराम से भाई ज़िन्दगी ज़रा आराम से तुम्हारे साथ-साथ दौड़ता नहीं फिर सकता अब मैं ऊँची-नीची घाटियों पहाड़ियों तो क्या महल-अटारियों पर भी न रात-भर नौका विहार न खुलकर बात-भर हँसना बतिया सकता हूँ हौले-हल्के बिल्कुल ही पास बैठकर और…

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