Celebrating Great Writing

Category: Munawwar Rana

आँखों को इंतज़ार की भट्टी पे रख दियामैंने दिये को आँधी की मर्ज़ी पे रख दिया आओ तुम्हें दिखाते हैं अंजामे-ज़िंदगीसिक्का ये कह के रेल की पटरी पे रख दिया फिर भी न दूर हो सकी आँखों से बेवगीमेंहदी ने…

मैं इस से पहले कि बिखरूँ इधर उधर हो जाऊँ मुझे सँभाल ले मुमकिन है दर-ब-दर हो जाऊँ ये आब-ओ-ताब जो मुझ में है सब उसी से है अगर वो छोड़ दे मुझ को तो मैं खंडर हो जाऊँ मिरी…

ये दरवेशों की बस्ती है यहाँ ऐसा नहीं होगा लिबास-ए-ज़िंदगी फट जाएगा मैला नहीं होगा शेयर-बाज़ार में क़ीमत उछलती गिरती रहती है मगर ये ख़ून-ए-मुफ़्लिस है कभी महँगा नहीं होगा तिरे एहसास की ईंटें लगी हैं इस इमारत में हमारा…

भुला पाना बहुत मुश्किल है सब कुछ याद रहता है मोहब्बत करने वाला इस लिए बरबाद रहता है अगर सोने के पिंजड़े में भी रहता है तो क़ैदी है परिंदा तो वही होता है जो आज़ाद रहता है चमन में…

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