थे दो घड़ी से शैख़ जी शेख़ी बघारते सारी वो शेख़ी उन की झड़ी दो घड़ी के बाद कहता रहा कुछ उस से अदू दो घड़ी तलक ग़म्माज़ ने फिर और जड़ी दो घड़ी के बाद परवाना गिर्द शम्अ के…