Celebrating Great Writing

Category: Jaun Elia

उसके पहलू से लग के चलते हैंहम कहाँ टालने से टलते हैं मैं उसी तरह तो बहलता हूँ यारोंऔर जिस तरह बहलते हैं वोह है जान अब हर एक महफ़िल कीहम भी अब घर से कम निकलते हैं क्या तकल्लुफ़…

मुझ को आदत है रूठ जाने की आप मुझ को मना लिया कीजे मिलते रहिए इसी तपाक के साथ बेवफ़ाई की इंतिहा कीजे कोहकन को है ख़ुद-कुशी ख़्वाहिश शाह-बानो से इल्तिजा कीजे मुझ से कहती थीं वो शराब आँखें आप…

उम्र गुज़रेगी इम्तहान में क्या?दाग ही देंगे मुझको दान में क्या? मेरी हर बात बेअसर ही रहीनुक्स है कुछ मेरे बयान में क्या? बोलते क्यो नहीं मेरे अपनेआबले पड़ गये ज़बान में क्या? मुझको तो कोई टोकता भी नहींयही होता…

आदमी वक़्त पर गया होगा वक़्त पहले गुज़र गया होगा वो हमारी तरफ़ न देख के भी कोई एहसान धर गया होगा ख़ुद से मायूस हो के बैठा हूँ आज हर शख़्स मर गया होगा शाम तेरे दयार में आख़िर…

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