Celebrating Great Writing

Category: jagjit Singh

दिल के दीवार-ओ-दर पे क्या देखा बस तिरा नाम ही लिखा देखा तेरी आँखों में हम ने क्या देखा कभी क़ातिल कभी ख़ुदा देखा अपनी सूरत लगी पराई सी जब कभी हम ने आईना देखा हाए अंदाज़ तेरे रुकने का…

सदमा तो है मुझे भी कि तुझ से जुदा हूँ मैं लेकिन ये सोचता हूँ कि अब तेरा क्या हूँ मैं बिखरा पड़ा है तेरे ही घर में तिरा वजूद बेकार महफ़िलों में तुझे ढूँडता हूँ मैं मैं ख़ुद-कुशी के…

वो ख़त के पुर्ज़े उड़ा रहा थाहवाओं का रुख़ दिखा रहा था कुछ और भी हो गया नुमायाँमैं अपना लिक्खा मिटा रहा था उसी का ईमाँ बदल गया हैकभी जो मेरा ख़ुदा रहा था वो एक दिन एक अजनबी कोमेरी…

Miss Tondon met with an accident and has expired” (कुमारी टंडन का एक्सीडेण्ट हुआ और उनका देहान्त हो गया है)। निदा बहुत दु:खी हुए और उन्होंने पाया कि उनका अभी तक का लिखा कुछ भी उनके इस दुख को व्यक्त…

सामने है जो उसे लोग बुरा कहते हैं जिस को देखा ही नहीं उस को ख़ुदा कहते हैं ज़िंदगी को भी सिला कहते हैं कहने वाले जीने वाले तो गुनाहों की सज़ा कहते हैं फ़ासले उम्र के कुछ और बढ़ा…

आज तुम से बिछड़ रहा हूँ मैंआज कहता हूँ फिर मिलूँगा तुम्हेंतुम मेरा इंतज़ार करती रहोआज का ऐतबार करती रहो लोग कहते हैं वक़्त चलता हैऔर इंसान भी बदलता हैकाश रुक जाये वक़्त आज की रातऔर बदले न कोई आज…

मुहल्ले की सबसे निशानी पुरानीवो बुढ़िया जिसे बच्चे कहते थे नानीवो नानी की बातों में परियों का डेरावो चहरे की झुरिर्यों में सदियों का फेराभुलाये नहीं भूल सकता है कोईवो छोटी सी रातें वो लम्बी कहानी कड़ी धूप में अपने…

मैं अपने दिल से निकालूँ ख़याल किस किस का जो तू नहीं तो कोई और याद आए मुझे ज़माना दर्द के सहरा तक आज ले आया गुज़ार कर तिरी ज़ुल्फ़ों के साए साए मुझे वो मेरा दोस्त है सारे जहाँ…

तेरी बेरुख़ी और तेरी मेहरबानीयही मौत है और यही ज़िंदगानी वही इक फ़साना वही इक कहानीजवानी जवानी जवानी जवानी लबों पर तबस्सुम तो आँखों में पानीयही है यही दिल जलों की निशानी (तबस्सुम = मुस्कराहट) बताऊँ है क्या आँसुओं की हक़ीक़तजो…

मैं शहर से फिर आ गया ख़याल था कि पा गया उसे जो मुझ से दूर थी मगर मिरी ज़रूर थी और इक हसीन शाम को मैं चल पड़ा सलाम को गली का रंग देख कर नई तरंग देख कर…

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