Celebrating Great Writing

Category: hindi kavita

आशा आशा मरेलोग देश के हरे! देख पड़ा है जहाँ,सभी झूठ है वहाँ,भूख-प्यास सत्य,होंठ सूख रहे हैं अरे! आस कहाँ से बंधे?सांस कहाँ से सधे?एक एक दास,मनस्काम कहाँ से सरे? रूप-नाम हैं नहीं,कौन काम तो सही?मही-गगन एक,कौन पैर तो यहाँ…

धुँधली हुईं दिशाएँ, छाने लगा कुहासा,कुचली हुई शिखा से आने लगा धुआँ-सा।कोई मुझे बता दे, क्या आज हो रहा है;मुँह को छिपा तिमिर में क्यों तेज रो रहा है?दाता, पुकार मेरी, संदीप्ति को जिला दे,बुझती हुई शिखा को संजीवनी पिला…

निगाहों के तक़ाज़े चैन से मरने नहीं देते यहाँ मंज़र ही ऐसे हैं कि दिल भरने नहीं देते ये लोग औरों के दुख जीने निकल आए हैं सड़कों पर अगर अपना ही ग़म होता तो यूँ धरने नहीं देते यही…

आप की आँखों में कुछ महके हुए से राज़ हैआपसे भी खूबसूरत आपके अंदाज़ हैंआप की आँखों में कुछ महके हुए से राज़ हैलब हिले तो मोगरे के फूल खिलते हैं कहीं आप की आँखों में क्या साहिल भी मिलते…

मेरे साथ तुम भी दुआ करो यूँ किसी के हक़ में बुरा न होकहीं और हो न ये हादसा कोई रास्ते में जुदा न हो मेरे घर से रात की सेज तक वो इक आँसू की लकीर हैज़रा बढ़ के…

नदी बोली समन्दर से, मैं तेरे पास आई हूँ।मुझे भी गा मेरे शायर, मैं तेरी ही-ही रुबाई हूँ॥ मुझे ऊँचाइयों का वह अकेलापन नहीं भाया;लहर होते हुये भी तो मेरा मन न लहराया;मुझे बाँधे रही ठंडे बरफ की रेशमी काया।बड़ी…

मधुर-मधुर कुछ गा दो मालिक!प्रलय-प्रणय की मधु-सीमा मेंजी का विश्व बसा दो मालिक! रागें हैं लाचारी मेरी,तानें बान तुम्हारी मेरी,इन रंगीन मृतक खंडों पर,अमृत-रस ढुलका दो मालिक!मधुर-मधुर कुछ गा दो मालिक! जब मेरा अलगोजा बोले,बल का मणिधर, स्र्ख रख डोले,खोले…

आएगा कोई चल के ख़िज़ाँ से बहार मेंसदियाँ गुज़र गई हैं इसी इंतिज़ार में (ख़िज़ाँ = पतझड़) छिड़ते ही साज़-ए-बज़्म में कोई न था कहींवो कौन था जो बोल रहा था सितार में ये और बात है कोई महके कोई…

गाँव मिट जायेगा शहर जल जायेगाज़िन्दगी तेरा चेहरा बदल जायेगा कुछ लिखो मर्सिया मसनवी या ग़ज़लकोई काग़ज़ हो पानी में गल जायेगा अब उसी दिन लिखूँगा दुखों की ग़ज़लजब मेरा हाथ लोहे में ढल जायेगा मैं अगर मुस्कुरा कर उन्हें…

कभी आँसू कभी ख़ुशी बेचीहम ग़रीबों ने बेकसी बेची (बेकसी = दुःख, कष्ट, तक़लीफ़, बेबसी, विवशता) चन्द साँसे ख़रीदने के लियेरोज़ थोड़ी सी ज़िन्दगी बेची जब रुलाने लगे मुझे सायेमैंने उकता के रौशनी बेची एक हम थे के बिक गये ख़ुद…

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