Celebrating Great Writing

Category: gulzar

जो ग़ैर थे वो इसी बात पर हमारे हुए कि हम से दोस्त बहुत बे-ख़बर हमारे हुए किसे ख़बर वो मोहब्बत थी या रक़ाबत थी बहुत से लोग तुझे देख कर हमारे हुए अब इक हुजूम-ए-शिकस्ता-दिलाँ है साथ अपने जिन्हें…

कहीं तो गर्द उड़े या कहीं ग़ुबार दिखे कहीं से आता हुआ कोई शहसवार दिखे ख़फ़ा थी शाख़ से शायद कि जब हवा गुज़री ज़मीं पे गिरते हुए फूल बे-शुमार दिखे रवाँ हैं फिर भी रुके हैं वहीं पे सदियों…

वो ख़त के पुर्ज़े उड़ा रहा थाहवाओं का रुख़ दिखा रहा था कुछ और भी हो गया नुमायाँमैं अपना लिक्खा मिटा रहा था उसी का ईमाँ बदल गया हैकभी जो मेरा ख़ुदा रहा था वो एक दिन एक अजनबी कोमेरी…

ऐसा ख़ामोश तो मंज़र न फ़ना का होता मेरी तस्वीर भी गिरती तो छनाका होता यूँ भी इक बार तो होता कि समुंदर बहता कोई एहसास तो दरिया की अना का होता साँस मौसम की भी कुछ देर को चलने…

दर्द हल्का है साँस भारी है जिए जाने की रस्म जारी है आप के ब’अद हर घड़ी हम ने आप के साथ ही गुज़ारी है रात को चाँदनी तो ओढ़ा दो दिन की चादर अभी उतारी है शाख़ पर कोई…

waqt Gulzar

वह उड़ रहा है कि जैसे इस बेकराँ समंदर सेभाप उड़ती हैऔर दिखती नहीं कहीं भी, कदम वजनी इमारतों में,कुछ ऐसे रखा है, जैसे कागज पे बट्टा रख दें,दबा दें, तारीख उड़ ना जाये,मैं वक्त कैसे बयाँ करूँ, वक्त और…

काँच के पीछे चाँद भी था और काँच के ऊपर काई भी तीनों थे हम वो भी थे और मैं भी था तन्हाई भी यादों की बौछारों से जब पलकें भीगने लगती हैं सोंधी सोंधी लगती है तब माज़ी की…

बारिश से बचने की तैयारी जारी हैसारी दरारें बन्द कर ली हैंऔर लीप के छत, अब छतरी भी मढ़वा ली हैखिड़की जो खुलती है बाहरउसके ऊपर भी एक छज्जा खींच दिया हैमेन सड़क से गली में होकर, दरवाज़े तक आता…

दिन कुछ ऐसे गुज़ारता है कोई जैसे एहसाँ उतारता है कोई दिल में कुछ यूँ सँभालता हूँ ग़म जैसे ज़ेवर सँभालता है कोई आइना देख कर तसल्ली हुई हम को इस घर में जानता है कोई पेड़ पर पक गया…

धूप आने दोबहुत मीठी है, खूबसूरत हैज़मीं, हम जानते हैंगुड़ की ढेली है बड़ी मोहलिक हवा उतरी हैइस परइसे घुन ना लगेहट कर, ज़रासी देर ठहरोधूप आने दोउठेगा आफ़ताब और छानेगा किरनों सेइस मोहलिक हवा को मकोड़ों की तरह ना…

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