Celebrating Great Writing

Category: Ghazal

गाँव मिट जायेगा शहर जल जायेगा ज़िन्दगी तेरा चेहरा बदल जायेगा कुछ लिखो मर्सिया मसनवी या ग़ज़ल कोई काग़ज़ हो पानी में गल जायेगा अब उसी दिन लिखूँगा दुखों की ग़ज़ल जब मेरा हाथ लोहे में ढल जायेगा मैं अगर…

जवाँ होने से पहले ही बुढ़ापा आ गया हम पर हमारी मुफ़्लिसी पर उम्र की उजलत ज़ियादा थी ज़माने से अलग रह कर भी मैं शामिल रहा इस में मिरे इंकार में इक़रार की निय्यत ज़ियादा थी मयस्सर मुफ़्त में…

कोई नहीं है आने वाला फिर भी कोई आने को है आते-जाते रात और दिन में कुछ तो जी बहलाने को है चलो यहाँ से, अपनी-अपनी शाखों पर लौट आए परिन्दे भूली-बिसरी यादों को फिर ख़ामोशी दोहराने को है दो…

तुम्हें जीने में आसानी बहुत है तुम्हारे ख़ून में पानी बहुत है ज़हर-सूली ने गाली-गोलियों ने हमारी जात पहचानी बहुत है कबूतर इश्क का उतरे तो कैसे तुम्हारी छत पे निगरानी बहुत है इरादा कर लिया गर ख़ुदकुशी का तो…

जब भी चाहें एक नई सूरत बना लेते हैं लोग एक चेहरे पर कई चेहरे सजा लेते हैं लोग मिल भी लेते हैं गले से अपने मतलब के लिए आ पड़े मुश्किल तो नज़रें भी चुरा लेते हैं लोग है…

दिलों में आग लबों पर गुलाब रखते हैं सब अपने चेहरों पे दोहरी नका़ब रखते हैं हमें चराग समझ कर बुझा न पाओगे हम अपने घर में कई आफ़ताब रखते हैं बहुत से लोग कि जो हर्फ़-आश्ना भी नहीं इसी…

२) ‘धक्का देकर किसी को आगे जाना पाप है’ अत: तुम भीड़ से अलग हो गए। ‘महत्वाकांक्षा ही सब दुखों का मूल है’ इसलिए तुम जहाँ थे वहीं बैठ गए। ‘संतोष परम धन है’ मानकर तुमने सब कुछ लुट जाने…

किस को पार उतारा तुम ने किस को पार उतारोगे मल्लाहो तुम परदेसी को बीच भँवर में मारोगे मुँह देखे की मीठी बातें सुनते इतनी उम्र हुई आँख से ओझल होते होते जी से हें बिसारोगे आज तो हम को…

Hum Dhuein Me Jab Zara Utre Dhuaan Khulne Laga Rajesh Reddy हम धुएँ में जब ज़रा उतरे, धुआँ खुलने लगा । राख में मलबा कुरेदा तो मकाँ खुलने लगा । जैसे-जैसे उस तआल्लुक़ का गुमाँ खुलने लगा, क्या नहीं था…

Dur se hi bas dariya dariya lagta hai👇मैं ही न मानूँ मेरे बिखरने में वर्ना दुनिया भर को हाथ तुम्हारा लगता है ज़ेहन से काग़ज़ पर तस्वीर उतरते ही एक मुसव्विर कितना अकेला लगता है प्यार के इस नश्शा को…

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