Celebrating Great Writing

Category: Ghazal

मुझसे शेरों का ये ब्योपार नहीं हो सकतामैं कभी दुश्मने मेयार[1] नहीं हो सकता इसमें ख़बरें हैं मुहब्बत की ,रफ़ाक़त[2] की हुज़ूर !ये मेरे मुल्क का अखबार नहीं हो सकता कितनी दौलत है अंधेरों का मुलाज़िम बनकरपर मैं ज़ुल्मत[3] का तरफ़दार नहीं हो सकता…

इक ज़हर के दरिया को दिन-रात बरतता हूँ ।हर साँस को मैं, बनकर सुक़रात, बरतता हूँ । खुलते भी भला कैसे आँसू मेरे औरों पर,हँस-हँस के जो मैं अपने हालात बरतता हूँ । कंजूस कोई जैसे गिनता रहे सिक्कों को,ऐसे…

मौत तो आनी है तो फिर मौत का क्यूँ डर रखूँ ज़िंदगी आ तेरे क़दमों पर मैं अपना सर रखूँ जिस में माँ और बाप की सेवा का शुभ संकल्प हो चाहता हूँ मैं भी काँधे पर वही काँवर रखूँ…

निगाहों के तक़ाज़े चैन से मरने नहीं देते यहाँ मंज़र ही ऐसे हैं कि दिल भरने नहीं देते ये लोग औरों के दुख जीने निकल आए हैं सड़कों पर अगर अपना ही ग़म होता तो यूँ धरने नहीं देते यही…

सफ़र में धूप तो होगी जो चल सको तो चलो सभी हैं भीड़ में तुम भी निकल सको तो चलो किसी के वास्ते राहें कहाँ बदलती हैं तुम अपने आप को ख़ुद ही बदल सको तो चलो यहाँ किसी को…

अगर हम कहें और वो मुस्कुरा देंहम उनके लिए ज़िंदगानी लुटा दें हर एक मोड़ पर हम ग़मों को सज़ा देंचलो ज़िन्दगी को मोहब्बत बना दें अगर ख़ुद को भूले तो, कुछ भी न भूलेकि चाहत में उनकी, ख़ुदा को…

आप की आँखों में कुछ महके हुए से राज़ हैआपसे भी खूबसूरत आपके अंदाज़ हैंआप की आँखों में कुछ महके हुए से राज़ हैलब हिले तो मोगरे के फूल खिलते हैं कहीं आप की आँखों में क्या साहिल भी मिलते…

मेरे साथ तुम भी दुआ करो यूँ किसी के हक़ में बुरा न होकहीं और हो न ये हादसा कोई रास्ते में जुदा न हो मेरे घर से रात की सेज तक वो इक आँसू की लकीर हैज़रा बढ़ के…

किताबों से कभी गुज़रो तो यूँ किरदार मिलते हैंगए वक़्तों की ड्योढ़ी में खड़े कुछ यार मिलते हैं जिसे हम दिल का वीराना समझकर छोड़ आये थेवहाँ उजड़े हुए शहरों के कुछ आसार मिलते हैं -गुलज़ार Please follow and like us:

नदी बोली समन्दर से, मैं तेरे पास आई हूँ।मुझे भी गा मेरे शायर, मैं तेरी ही-ही रुबाई हूँ॥ मुझे ऊँचाइयों का वह अकेलापन नहीं भाया;लहर होते हुये भी तो मेरा मन न लहराया;मुझे बाँधे रही ठंडे बरफ की रेशमी काया।बड़ी…

Back to top