Celebrating Great Writing

Category: Festivals

यह मिट्टी की चतुराई है,रूप अलग औ’ रंग अलग,भाव, विचार, तरंग अलग हैं,ढाल अलग है ढंग अलग, आजादी है जिसको चाहो आज उसे वर लोहोली है तो आज अपरिचित से परिचय कर को ! निकट हुए तो बनो निकटतरऔर निकटतम…

तेरे गालों पे जब गुलाल गुलाल लगाये जहां मुझ को लाल लाल लगा– नासिर अमरोहवी बादल आए हैं घिर गुलाल के लालकुछ किसी का नहीं किसी को ख़याल– रंगीन सआदत यार ख़ां पूरा करेंगे होली में क्या वादा-ए-विसालजिन को अभी बसंत की ऐ…

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