Celebrating Great Writing

Category: Festival

यह मिट्टी की चतुराई है,रूप अलग औ’ रंग अलग,भाव, विचार, तरंग अलग हैं,ढाल अलग है ढंग अलग, आजादी है जिसको चाहो आज उसे वर लोहोली है तो आज अपरिचित से परिचय कर को ! निकट हुए तो बनो निकटतरऔर निकटतम…

दीप कैसा हो, कहीं हो, सूर्य का अवतार है वह,धूप में कुछ भी न, तम में किन्तु पहरेदार है वह,दूर से तो एक ही बस फूंक का वह है तमाशा,देह से छू जाय तो फिर विप्लवी अंगार है वह,व्यर्थ है…

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