Celebrating Great Writing

Category: Chitransh Khare

जो मेरी छत का रस्ता चाँद ने देखा नही होतातो शायद चाँदनी लेकर यहाँ उतरा नही होता दुआयें दो तुम्हे मशहूर हमने कर दिया वरनानजर अंदाज कर देते तो ये जलवा नहीं होता अभी तो और भी मौसम पडे़ है…

हमारे सब्र का इक इम्तिहान बाक़ी है इसी लिए तो अभी तक ये जान बाक़ी है वो नफ़रतों की इमारत भी गिर गई देखो मोहब्बतों का ये कच्चा मकान बाक़ी है मिरा उसूल है ग़ज़लों में सच बयाँ करना मैं…

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