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Category: Bollywood lyrics

जहाँ पे सवेरा हो बसेरा वहीं है…कभी पास बैठो, किसी फूल के पाससुनो जब महकता है, बहुत कुछ ये कहता हैओ कभी गुनगुना के, कभी मुस्कुरा केकभी चुपके-चुपके, कभी खिलखिला केजहाँ पे सवेरा हो बसेरा वहीं हैजहाँ पे सवेरा हो…

हर एक फूल किसी याद सा महकता हैतेरे खयाल से जागी हुई फ़िज़ाएं हैंये सब्ज़ पेड़ हैं या प्यार की दुआएं हैंतू पास हो कि नहीं फिर भी तू मुकाबिल है, जहाँ भी …हर एक शय है मुहब्बत के नूर…

प्यार मुझसे जो किया तुमने तो क्या पाओगीमेरे हालात की आंधी में बिखर जाओगी रंज और दर्द की बस्ती का मैं बाशिन्दा हूँये तो बस मैं हूँ के इस हाल में भी ज़िन्दा हूँख़्वाब क्यूँ देखूँ वो कल जिसपे मैं…

तमाम उम्र मैं इक अजनबी के घर में रहा ।सफ़र न करते हुए भी किसी सफ़र में रहा । वो जिस्म ही था जो भटका किया ज़माने में,हृदय तो मेरा हमेशा तेरी डगर में रहा । तू ढूँढ़ता था जिसे…

वो सर-फिरी हवा थी सँभलना पड़ा मुझे मैं आख़िरी चराग़ था जलना पड़ा मुझे महसूस कर रहा था उसे अपने आस पास अपना ख़याल ख़ुद ही बदलना पड़ा मुझे सूरज ने छुपते छुपते उजागर किया तो था लेकिन तमाम रात…

मेरा वो सामान लौटा दो…एक अकेले छतरी  में जब आधे आधे भीग रहे थे आधे सूखे आधे गिले, सुखा तो मैं ले आयी थी गीला मन शायद, बिस्तर के पास पडा हो वो भिजवा दो, मेरा वो सामान लौटा दो…एक सौ…

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