Celebrating Great Writing

Category: birth Anniversary

शेर से शाइरी से डरते हैं कम-नज़र रौशनी से डरते हैं लोग डरते हैं दुश्मनी से तिरी हम तिरी दोस्ती से डरते हैं दहर में आह-ए-बे-कसाँ के सिवा और हम कब किसी से डरते हैं हम को ग़ैरों से डर…

शायद यह भी एक वजह थी इन्होंने इतनी शादियां कीं लेकिन फिर भी लड़के से मरहूम रहे। उन्होंने 11 वीं शादी मेरी अम्मी सरदारी बेगम से की जो कश्मीरी थी ।अम्मी के वालिद जनाब अब्दुल अजीज पेशे से ठेकेदार थे…

निदा फाजली उर्दू और हिंदी दुनिया के अजीम शायरों और गीतकारों में आज भी शुमार हैं. उनके गीत काफी सरल माने जाते हैं, जो हर एक की जुबान पर चढ़े रहते थे. ऐसी ही खासियत थी गज़ल गायक जगजीत साहब…

कोई ये कैसे बताए कि वो तन्हा क्यूँ है वो जो अपना था वही और किसी का क्यूँ है यही दुनिया है तो फिर ऐसी ये दुनिया क्यूँ है यही होता है तो आख़िर यही होता क्यूँ है इक ज़रा…

तमाम उम्र मैं इक अजनबी के घर में रहा ।सफ़र न करते हुए भी किसी सफ़र में रहा । वो जिस्म ही था जो भटका किया ज़माने में,हृदय तो मेरा हमेशा तेरी डगर में रहा । तू ढूँढ़ता था जिसे…

मोहब्बतों के सफ़र पर निकल के देखूँगा ये पुल-सिरात अगर है तो चल के देखूँगा सवाल ये है कि रफ़्तार किस की कितनी है मैं आफ़्ताब से आगे निकल के देखूँगा मज़ाक़ अच्छा रहेगा ये चाँद-तारों से मैं आज शाम…

मगर लिखवाए कोई उस को ख़त तो हम से लिखवाए हुई सुब्ह और घर से कान पर रख कर क़लम निकले हुई इस दौर में मंसूब मुझ से बादा-आशामी फिर आया वो ज़माना जो जहाँ में जाम-ए-जम निकले हुई जिन…

चौराहे पर लुटता चीरप्यादे से पिट गया वज़ीरचलूँ आख़िरी चाल के बाजी छोड़ विरक्ति रचाऊँ मैंराह कौन सी जाऊँ मैं सपना जन्मा और मर गयामधु ऋतु में ही बाग़ झर गयातिनके बिखरे हुए बटोरूँ या नव सॄष्टि सजाऊँ मैंराह कौन सी जाऊँ…

और फिर चन्द्रकान्ता के प्रेम और विछोह के बाद उस पर यह नया भेद खुला कि काव्य की परम्पराओं से पूरी जानकारी रखने, शैली में वृद्धि करने तथा नए विचार और नए शब्द देने के साथ-साथ केवल वही शायरी अधिक…

उम्र गुज़रेगी इम्तहान में क्या?दाग ही देंगे मुझको दान में क्या? मेरी हर बात बेअसर ही रहीनुक्स है कुछ मेरे बयान में क्या? बोलते क्यो नहीं मेरे अपनेआबले पड़ गये ज़बान में क्या? मुझको तो कोई टोकता भी नहींयही होता…

Back to top