Celebrating Great Writing

Category: Bhavani prasad Mishra

जिन्दगी में कोई बड़ा सुख नहीं है,इस बात का मुझे बड़ा दु:ख नहीं है,क्योंकि मैं छोटा आदमी हूँ,बड़े सुख आ जाएँ घर मेंतो कोई ऎसा कमरा नहीं है जिसमें उसे टिका दूँ। यहाँ एक बातइससे भी बड़ी दर्दनाक बात यह…

आराम से भाई ज़िन्दगी ज़रा आराम से तुम्हारे साथ-साथ दौड़ता नहीं फिर सकता अब मैं ऊँची-नीची घाटियों पहाड़ियों तो क्या महल-अटारियों पर भी न रात-भर नौका विहार न खुलकर बात-भर हँसना बतिया सकता हूँ हौले-हल्के बिल्कुल ही पास बैठकर और…

सागर से मिलकर जैसेनदी खारी हो जाती हैतबीयत वैसे हीभारी हो जाती है मेरीसम्पन्नों से मिलकर व्यक्ति से मिलने काअनुभव नहीं होताऐसा नहीं लगताधारा से धारा जुड़ी हैएक सुगंधदूसरी सुगंध की ओर मुड़ी है तो कहना चाहिएसम्पन्न व्यक्तिव्यक्ति नहीं हैवह…

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