Celebrating Great Writing

Category: Bashir Badr

सर झुकाओगे तो पत्थर देवता हो जाएगा इतना मत चाहो उसे वो बेवफ़ा हो जाएगा हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा कितनी सच्चाई से मुझ से ज़िंदगी ने कह…

मुसाफ़िर के रस्ते बदलते रहे मुक़द्दर में चलना था चलते रहे मिरे रास्तों में उजाला रहा दिए उस की आँखों में जलते रहे कोई फूल सा हाथ काँधे पे था मिरे पाँव शो’लों पे जलते रहे सुना है उन्हें भी…

सुन ली जो ख़ुदा ने वो दुआ तुम तो नहीं होदरवाज़े पे दस्तक की सदा तुम तो नहीं हो (सदा = आवाज़) महसूस किया तुम को तो गीली हुईं पलकेंभीगे हुए मौसम की अदा तुम तो नहीं हो अन्जानी सी राहों में नहीं…

ऐ हुस्न-ए-बे-परवाह तुझे शबनम कहूँ शोला कहूँफूलों में भी शोख़ी तो है किसको मगर तुझ-सा कहूँ गेसू उड़े महकी फ़िज़ा जादू करें आँखे तेरीसोया हुआ मंज़र कहूँ या जागता सपना कहूँ चंदा की तू है चांदनी लहरों की तू है रागिनीजान-ए-तमन्ना…

मैं कब तन्हा हुआ था याद होगा तुम्हारा फ़ैसला था याद होगा बहुत से उजले उजले फूल ले कर कोई तुम से मिला था याद होगा बिछी थीं हर तरफ़ आँखें ही आँखें कोई आँसू गिरा था याद होगा उदासी…

कोई फूल सा हाथ काँधे पे था मिरे पाँव शो’लों पे जलते रहे सुना है उन्हें भी हवा लग गई हवाओं के जो रुख़ बदलते रहे वो क्या था जिसे हम ने ठुकरा दिया मगर उम्र भर हाथ मलते रहे…

अगर यक़ीं नहीं आता तो आज़माए मुझे वो आइना है तो फिर आइना दिखाए मुझे अजब चराग़ हूँ दिन रात जलता रहता हूँ मैं थक गया हूँ हवा से कहो बुझाए मुझे मैं जिस की आँख का आँसू था उस…

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