जाते हुए नहीं रहा फिर भी हमारे ध्यान में देखी भी हम ने मछलियाँ शीशे के मर्तबान में पहले भी अपनी झोलियाँ झाड़ कर उठ गए थे हम ऐसी ही एक रात थी ऐसी ही दास्तान में साथ ज़ईफ़ बाप…