बन चुके बहुत तुम ज्ञानचंद,बुद्धिप्रकाश, विद्यासागर?पर अब कुछ दिन को कहा मान,तुम लाला मूसलचंद बनो!अब मूर्ख बनो, मतिमंद बनो! यदि मूर्ख बनोगे तो प्यारे,दुनिया में आदर पाओगे।जी, छोड़ो बात मनुष्यों की,देवों के प्रिय कहलाओगे!लक्ष्मीजी भी होंगी प्रसन्न,गृहलक्ष्मी दिल से चाहेंगी।हर…