Celebrating Great Writing

Category: Ajay Sahaab

तय था हमारा क़त्ल ,सज़ा के बगै़र भीमुजरिम हमीं बने थे ,ख़ता के बग़ैर भी कोई हुनर नहीं है पे , मशहूर हैं बहोतजलते हैं ये चिराग़ ,हवा के बग़ैर भी जब भी किसी ने हाथ पे, लिक्खा है मेरा…

कहीं ऐसा न हो तकल्लुफ़ को दिल का रिश्ता समझ ले दिल मेरा इस तरह पास पास रहने से तुम को अपना समझ ले दिल मेरा यूँ ही कह दो कि आओगे मिलने और मैं इंतिज़ार कर बैठूँ रोज़ मिलना…

सोचते हैं कि कहाँ जा के तलाशें उन को हम को कुछ दोस्त मिले थे कभी खोने वाले रेत के जैसा है अब तो ये मुक़द्दर मेरा ख़ुद बिखर जाएँगे अब मुझ को पिरोने वाले दर्द और अश्क ज़माने में…

जब भी मिलते हैं तो जीने की दुआ देते हैं जाने किस बात की वो हम को सज़ा देते हैं हादसे जान तो लेते हैं मगर सच ये है हादसे ही हमें जीना भी सिखा देते हैं रात आई तो…

यूँ ही हर बात पे हँसने का बहाना आए फिर वो मा’सूम सा बचपन का ज़माना आए काश लौटें मिरे पापा भी खिलौने ले कर काश फिर से मिरे हाथों में ख़ज़ाना आए काश दुनिया की भी फ़ितरत हो मिरी…

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