Celebrating Great Writing

Author: shajarekhwab

जीवन क्या है चलता फिरता एक खिलौना है दो आँखों में एक से हँसना एक से रोना है जो जी चाहे वो मिल जाये कब ऐसा होता है हर जीवन जीवन जीने का समझौता है अब तक जो होता आया…

कभी तो शाम ढले अपने घर गए होते किसी की आँख में रह कर सँवर गए होते सिंगार-दान में रहते हो आइने की तरह किसी के हाथ से गिर कर बिखर गए होते ग़ज़ल ने बहते हुए फूल चुन लिए…

कभी तो शाम ढले अपने घर गए होते किसी की आँख में रह कर सँवर गए होते सिंगार-दान में रहते हो आइने की तरह किसी के हाथ से गिर कर बिखर गए होते ग़ज़ल ने बहते हुए फूल चुन लिए…

सारे जहाँ से अच्छा, हिन्दोस्ताँ हमारा हम बुलबुलें हैं इसकी, यह गुलिस्ताँ हमारा ग़ुरबत में हों अगर हम, रहता है दिल वतन में समझो वहीं हमें भी, दिल हो जहाँ हमारा परबत वो सबसे ऊँचा, हमसाया आसमाँ का वो संतरी…

आज फिर चाँद की पेशानी से उठता है धुआँ आज फिर महकी हुई रात में जलना होगा आज फिर सीने में उलझी हुई वज़नी साँसें फट के बस टूट ही जाएँगी, बिखर जाएँगी आज फिर जागते गुज़रेगी तेरे ख्वाब में…

गणेशोत्सव (गणेश + उत्सव) हिन्दुओं का एक उत्सव है। वैसे तो यह कमोबेश पूरे भारत में मनाया जाता है, यह उत्सव, हिन्दूपंचांग के अनुसार भाद्रपद मास की चतुर्थी से चतुर्दशी (चार तारीख से चौदह तारीख तक) तक दस दिनों तक…

कौन तुम मेरे हृदय में? कौन मेरी कसक में नित मधुरता भरता अलक्षित? कौन प्यासे लोचनों में घुमड़ घिर झरता अपरिचित? स्वर्ण-स्वप्नों का चितेरा नींद के सूने निलय में! कौन तुम मेरे हृदय में? अनुसरण निश्वास मेरे कर रहे किसका…

तोड़ के घुंघरू छोड़ के महफ़िल चुप का बरन क्यूँ पहना है पेट पे खुजली मुँह पर दाने वाह तेरा क्या कहना है क्यूँ शरमाए क्यूँ घबराए ये दुख हँस कर सहना है प्यारी बेटा यही मरज़ तो इस पेशे…

ये मो’जिज़ा भी मोहब्बत कभी दिखाए मुझे कि संग तुझ पे गिरे और ज़ख़्म आए मुझे मैं अपने पाँव तले रौंदता हूँ साए को बदन मिरा ही सही दोपहर न भाए मुझे ब-रंग-ए-ऊद मिलेगी उसे मिरी ख़ुश्बू वो जब भी…

ये मो’जिज़ा भी मोहब्बत कभी दिखाए मुझे कि संग तुझ पे गिरे और ज़ख़्म आए मुझे मैं अपने पाँव तले रौंदता हूँ साए को बदन मिरा ही सही दोपहर न भाए मुझे ब-रंग-ए-ऊद मिलेगी उसे मिरी ख़ुश्बू वो जब भी…

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