Celebrating Great Writing

aankh me pani rakho hotho pe chingari rakho Dr. Rahat Indori

एक ही नद्दी के हैं ये दो किनारे दोस्तो

aankh me pani rakho hotho pe chingari rakho Dr. Rahat Indori

दोस्ताना ज़िंदगी से मौत से यारी रखो

आते जाते पल ये कहते हैं हमारे कान में

कूच का ऐलान होने को है तय्यारी रखो

ये ज़रूरी है कि आँखों का भरम क़ाएम रहे

नींद रखो या न रखो ख़्वाब मेयारी रखो

ये हवाएँ उड़ न जाएँ ले के काग़ज़ का बदन

दोस्तो मुझ पर कोई पत्थर ज़रा भारी रखो

ले तो आए शाइरी बाज़ार में ‘राहत’ मियाँ

क्या ज़रूरी है कि लहजे को भी बाज़ारी रखो

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shajarekhwab

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