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Aaj tumse bichhad raha hu mai Sudarshan Fakir Jagjit Singh

Aaj tumse bichhad raha hu mai Sudarshan Fakir Jagjit Singh

आज तुम से बिछड़ रहा हूँ मैं
आज कहता हूँ फिर मिलूँगा तुम्हें
तुम मेरा इंतज़ार करती रहो
आज का ऐतबार करती रहो

लोग कहते हैं वक़्त चलता है
और इंसान भी बदलता है
काश रुक जाये वक़्त आज की रात
और बदले न कोई आज के बाद

वक़्त बदले ये दिल न बदलेगा
तुम से रिश्ता कभी न टूटेगा
तुम ही ख़ुश्बू हो मेरी साँसों की
तुम ही मंज़िल हो मेरे सपनों की

लोग बुनते हैं प्यार के सपने
और सपने बिखर भी जाते हैं
एक एहसास ही तो है ये वफ़ा
और एहसास मर भी जाते हैं

-सुदर्शन फ़ाकिर

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