Celebrating Great Writing

प्यार मुझसे जो किया तुमने तो क्या पाओगीमेरे हालात की आंधी में बिखर जाओगी रंज और दर्द की बस्ती का मैं बाशिन्दा हूँये तो बस मैं हूँ के इस हाल में भी ज़िन्दा हूँख़्वाब क्यूँ देखूँ वो कल जिसपे मैं…

मस्जिदों पर जान दी कुर्बां शिवालों पर हुएकितने काले तजरूबे उजली किताबों पर हुए सर तलक तो बाद में आई मेरे दुश्मन की तेग़उससे पहले अनगिनत हमले ख़यालों पर हुए (तेग़ = तलवार) फ़ायदे-नुकसान में हमने न उलझाया दिमाग़अपने सारे…

फ़रिश्तों से भी अच्छा मैं बुरा होने से पहले था वो मुझ से इंतिहाई ख़ुश ख़फ़ा होने से पहले था किया करते थे बातें ज़िंदगी-भर साथ देने की मगर ये हौसला हम में जुदा होने से पहले था हक़ीक़त से…

अब हलो हाय में ही बात हुआ करती हैरास्ता चलते मुलाक़ात हुआ करती है दिन निकलता है तो चल पड़ता हूं सूरज की तरहथक के गिर पड़ता हूं जब रात हुआ करती है रोज़ इक ताज़ा ग़ज़ल कोई कहां तक…

कोई ये कैसे बताए कि वो तन्हा क्यूँ है वो जो अपना था वही और किसी का क्यूँ है यही दुनिया है तो फिर ऐसी ये दुनिया क्यूँ है यही होता है तो आख़िर यही होता क्यूँ है इक ज़रा…

हमारे सब्र का इक इम्तिहान बाक़ी है इसी लिए तो अभी तक ये जान बाक़ी है वो नफ़रतों की इमारत भी गिर गई देखो मोहब्बतों का ये कच्चा मकान बाक़ी है मिरा उसूल है ग़ज़लों में सच बयाँ करना मैं…

हम तो बचपन में भी अकेले थे सिर्फ़ दिल की गली में खेले थे इक तरफ़ मोर्चे थे पलकों के इक तरफ़ आँसुओं के रेले थे थीं सजी हसरतें दुकानों पर ज़िंदगी के अजीब मेले थे ख़ुद-कुशी क्या दुखों का…

मैं अपने ख्व़ाब से बिछडा नज़र नहीं आतातो इस सदी में अकेला नज़र नहीं आता अजब दबाव है इन बाहरी हवाओं काघरों का बोझ भी उठता नज़र नहीं आता मैं तेरी राह से हटने को हट गया लेकिनमुझे तो कोई…

सर झुकाओगे तो पत्थर देवता हो जाएगा इतना मत चाहो उसे वो बेवफ़ा हो जाएगा हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा कितनी सच्चाई से मुझ से ज़िंदगी ने कह…

ना-रवा कहिए ना-सज़ा कहिए कहिए कहिए मुझे बुरा कहिए तुझ को बद-अहद ओ बेवफ़ा कहिए ऐसे झूटे को और क्या कहिए दर्द दिल का न कहिए या कहिए जब वो पूछे मिज़ाज क्या कहिए फिर न रुकिए जो मुद्दआ कहिए…

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