Celebrating Great Writing

जब दूरियों की आग दिलों को जलाएगी जिस्मों को चाँदनी में भिगोया करेंगे हम बिन कर हर एक बज़्म का मौज़ू-ए-गुफ़्तुगू शे’रों में तेरे ग़म को समोया करेंगे हम मजबूरियों के ज़हर से कर लेंगे ख़ुद-कुशी ये बुज़दिली का जुर्म…

तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है बहोत, मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते होतो फिर ये बताओ कि तुम उसकी आंखों के बारे में क्या जानते हो? ये ज्योग्राफियाँ, फ़लसफ़ा, साइकोलोजी, साइंस, रियाज़ी वगैरहये सब जानना भी अहम है मगर उसके घर का…

प्रिय की पृथुल जाँघ पर लेटी करती थीं जो रंगरलियाँ,उनकी कब्रों पर खिलती हैं नन्हीं जूही की कलियाँ। पी न सका कोई जिनके नव अधरों की मधुमय प्याली,वे भौरों से रूठ झूमतीं बन कर चम्पा की डाली। तनिक चूमने से…

हाथ छूटें भी तो रिश्ते नहीं छूटा करतेवक़्त की शाख़ से लम्हे नहीं टूटा करते जिसने पैरों के निशाँ भी नहीं छोड़े पीछेउस मुसाफ़िर का पता भी नहीं पूछा करते तूने आवाज़ नहीं दी कभी मुड़कर वरनाहम कई सदियाँ तुझे…

पूरा यहाँ का है न मुकम्मल वहाँ का हैये जो मिरा वजूद है जाने कहाँ का हैक़िस्सा ये मुख़्तसर सफ़र-ए-रायगाँ का है हैं कश्तियाँ यक़ीं की समुंदर गुमाँ का है(मुख़्तसर = थोड़ा, कम, संक्षिप्त), (सफ़र-ए-रायगाँ = व्यर्थ का सफ़र), (गुमाँ = गुमान,…

बे-हद बेचैनी है लेकिन मक़्सद ज़ाहिर कुछ भी नहींपाना खोना हँसना रोना क्या है आख़िर कुछ भी नहीं अपनी अपनी क़िस्मत सब की अपना अपना हिस्सा हैजिस्म की ख़ातिर लाखों सामाँ रूह की ख़ातिर कुछ भी नहीं उस की बाज़ी…

हर एक फूल किसी याद सा महकता हैतेरे खयाल से जागी हुई फ़िज़ाएं हैंये सब्ज़ पेड़ हैं या प्यार की दुआएं हैंतू पास हो कि नहीं फिर भी तू मुकाबिल है, जहाँ भी …हर एक शय है मुहब्बत के नूर…

जो मेरी छत का रस्ता चाँद ने देखा नही होतातो शायद चाँदनी लेकर यहाँ उतरा नही होता दुआयें दो तुम्हे मशहूर हमने कर दिया वरनानजर अंदाज कर देते तो ये जलवा नहीं होता अभी तो और भी मौसम पडे़ है…

सब पे तू मेहरबान है प्यारे कुछ हमारा भी ध्यान है प्यारे आ कि तुझ बिन बहुत दिनों से ये दिल एक सूना मकान है प्यारे तू जहाँ नाज़ से क़दम रख दे वो ज़मीन आसमान है प्यारे मुख़्तसर है…

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