Celebrating Great Writing

मुझसे शेरों का ये ब्योपार नहीं हो सकतामैं कभी दुश्मने मेयार[1] नहीं हो सकता इसमें ख़बरें हैं मुहब्बत की ,रफ़ाक़त[2] की हुज़ूर !ये मेरे मुल्क का अखबार नहीं हो सकता कितनी दौलत है अंधेरों का मुलाज़िम बनकरपर मैं ज़ुल्मत[3] का तरफ़दार नहीं हो सकता…

इक ज़हर के दरिया को दिन-रात बरतता हूँ ।हर साँस को मैं, बनकर सुक़रात, बरतता हूँ । खुलते भी भला कैसे आँसू मेरे औरों पर,हँस-हँस के जो मैं अपने हालात बरतता हूँ । कंजूस कोई जैसे गिनता रहे सिक्कों को,ऐसे…

झूटी ख़बरें घड़ने वाले झूटे शे’र सुनाने वाले लोगो सब्र कि अपने किए की जल्द सज़ा हैं पाने वाले दर्द आँखों से बहता है और चेहरा सब कुछ कहता है ये मत लिक्खो वो मत लिक्खो आए बड़े समझाने वाले…

आशा आशा मरेलोग देश के हरे! देख पड़ा है जहाँ,सभी झूठ है वहाँ,भूख-प्यास सत्य,होंठ सूख रहे हैं अरे! आस कहाँ से बंधे?सांस कहाँ से सधे?एक एक दास,मनस्काम कहाँ से सरे? रूप-नाम हैं नहीं,कौन काम तो सही?मही-गगन एक,कौन पैर तो यहाँ…

मौत तो आनी है तो फिर मौत का क्यूँ डर रखूँ ज़िंदगी आ तेरे क़दमों पर मैं अपना सर रखूँ जिस में माँ और बाप की सेवा का शुभ संकल्प हो चाहता हूँ मैं भी काँधे पर वही काँवर रखूँ…

धुँधली हुईं दिशाएँ, छाने लगा कुहासा,कुचली हुई शिखा से आने लगा धुआँ-सा।कोई मुझे बता दे, क्या आज हो रहा है;मुँह को छिपा तिमिर में क्यों तेज रो रहा है?दाता, पुकार मेरी, संदीप्ति को जिला दे,बुझती हुई शिखा को संजीवनी पिला…

निगाहों के तक़ाज़े चैन से मरने नहीं देते यहाँ मंज़र ही ऐसे हैं कि दिल भरने नहीं देते ये लोग औरों के दुख जीने निकल आए हैं सड़कों पर अगर अपना ही ग़म होता तो यूँ धरने नहीं देते यही…

सफ़र में धूप तो होगी जो चल सको तो चलो सभी हैं भीड़ में तुम भी निकल सको तो चलो किसी के वास्ते राहें कहाँ बदलती हैं तुम अपने आप को ख़ुद ही बदल सको तो चलो यहाँ किसी को…

ये दुनिया दो-रंगी है एक तरफ़ से रेशम ओढ़े एक तरफ़ से नंगी है एक तरफ़ अंधी दौलत की पागल ऐश-परस्ती एक तरफ़ जिस्मों की क़ीमत रोटी से भी सस्ती एक तरफ़ है सोनागाची एक तरफ़ चौरंगी है ये दुनिया…

अगर हम कहें और वो मुस्कुरा देंहम उनके लिए ज़िंदगानी लुटा दें हर एक मोड़ पर हम ग़मों को सज़ा देंचलो ज़िन्दगी को मोहब्बत बना दें अगर ख़ुद को भूले तो, कुछ भी न भूलेकि चाहत में उनकी, ख़ुदा को…

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